सोमवार, 3 जुलाई 2017

व्यंग

एक्साईज और सर्विस टैक्स का रिटायरमेंट

विवेक रंजन श्रीवास्तव विनम्र
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 महीने का आखिरी दिन मतलब सरकारी दफ्तरो में ढ़ेर सारे रिटायरमेंट और रिटायर होते लोगो की जगह इक्के दुक्के एपांइंटमेंट . बचे खुचे अफसरो को ही मल्टीपल चार्ज दिये जा रहे हैं , सरकारी विभागो में इन दिनो लोगो के रावण जैसे कई कई सिर उगाये जा रहे हैं   . रिटायर होने वाला खुश होता है कि चलो  सही सलामत कट गई .  फैक्ट्री या दफ्तरो के मुख्य दरवाजे पर आजकल  महीने के आखिरी दिन बारात जैसा वातावरण होता है .बैंड , फूलो से सजी गाड़ी , रास्ता जाम ,फटाको का शोर ,  गुलाल उड़ाते लोग एक साथ ही होली दीवाली सब आ जाती है . इससे पहले हर रिटायर होते कर्मचारी अफसर को सर्वश्रेष्ठ इम्पलायी बताते हुये भाषण होते हैं . शाल , श्रीफल , स्मृति चिंह , एकाध प्रशस्ति पत्र , रिटायर होकर बिदा होने वाले के ओहदे के अनुरूप कोई उपहार पकड़ाकर उसे उसके परिवार के हवाले कर दिया जाता है . पत्नी भी घर पहुंचे पति की आरती उतारती है . दो एक दिनो पहले से रिटायरमेंट के बाद तक रात को होटलो में पार्टियां लेने देने  का दौर होता है . कई बार तो जब बिदाई भाषणो में रिटायर व्यक्ति के गुण सुनने को मिलते हैं तो लगता है कि क्या यह उसी आदमी के विषय में बोला जा रहा है , जिस खडूस को हम इतने  दिनो से झेल रहे थे . खैर परिवर्तन प्रकृति का नियम है , एक के जाते ही दूसरा आ जाता है . नये अफसर का स्वागत होता है . अखबारो में विज्ञप्तियां छपती हैं जिनमें नये प्रभारी  मुस्कराती फोटो के साथ अपनी कार्य शैली और लक्ष्य उद्घोषित करते हैं .
 कुछ इसी तरह तीस जून को एक्साईज और सर्विस टैक्स , एंट्री टैक्स वगैरह भी रिटायर हो गये . दोनो देश और राज्यो के कमाऊ पुत्र थे .केवल सरकारो के ही नही , एक्साईज और सर्विस टैक्स से जुड़े छोटे बड़े अफसरों , और वकीलो की भी तिजोरी भरने में इन्होंने कहीं कोई कमी नही छोड़ी .सफेद को काला बनाने में इन टैक्सो का योगदान याद किया जाता रहेगा .  एक जुलाई रात बारह बजे समारोह पूर्वक इनकी जगह आम जनता का कर मुंडन करने जी एस टी ने प्रभार ले लिया है . सरकार की पौ बारह है , ऐसा माना जा रहा है.  मुझे तो उन पत्नियो की चिंता हो रही है , जिनकी शादी ही उनके पिताजी ने अच्छे खासे प्रोफेसर का रिश्ता ठुकराकर एक्साईज इंस्पेक्टर से कर दी थी . बेचारे इंस्पेक्टर साहब जगह जगह सेमीनार करते हुये लोगो में नये गुड्स एन्ड सर्विस टैक्स के लिये एक्सैप्टिबिलिटी का वातावरण बनाते घूम रहे हैं . वकील , चार्टेड एकाउंटेंट जी एस टी के  लूप होल तलाश रहे हैं . चांदी तो साफ्टवेयर बनाने और बेचने वालों की है , बौद्धिक संपदा की वैल्यू की ही जानी चाहिये .
 जैसे रिटायर होते अफसर पर पुरानी फाइलो को निपटाने का प्रैशर होता है , कुछ उसी तरह जगह जगह प्री जीएसटी सेल लगीं . स्टाक क्लियेरेंस के लिये औने पौने दामो चीजें बेंची गईं . नया अफसर पहले माहौल समझता है तब काम शुरू होता है , इसी तरह जी एस टी लग तो गया है पर अभी  समझा समझी का दौर है .
 जीएसटी पूरी तरह कम्प्यूटरी कृत व्यवस्था है . मतलब साफ है कि यदि अगला विश्वयुद्ध लड़ा जायेगा तो वह साइबर युद्ध होगा . किसी भी देश के मुख्य सर्वर्स के हार्डवेयर्स डिस्ट्राय कर दिये जायें , या उस देश का इंटरनेट क्रेश कर दिया जाये , कम्प्यूटर्स हैक कर लिये जायें , साफ्टवेयर्स में वायरस डाल दिये जायें तो देशो की व्यवस्थायें चकनाचूर होते देर नहीं लगेगी . खैर अच्छा अच्छा सोचना चाहिये . यह तो मैने केवल इसलिये लिख दिया कि बाद में मत कहना कि बताया नही था .
 जीएसटी को समझाने के लिये व्हाट्सअप ज्ञानियो ने तरह तरह के मैसेज किये ,  वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी प्रणाली में गरीब और अमीर एक दर से कर देंगे , मैसेज आया , सुपर मार्केट में चीज़ें सस्ती होगी, मोहल्ले की परचून की दुकान, यहाँ तक कि पटरी वाले की चीज़ें भी महँगी होगी , सुपर मार्केट वाले इनपुट क्रेडिट का भरपूर लाभ लेंगे, परचूनिया कुछ नहीं ले पायेगा . मानो  गरीब सुपर मार्केट में नहीं जाते . एक मेसेज आया कि  शादी से पहले देर रात लौटने पर घर पर हरेक को जबाब देना होता था , पर शादी के बाद केवल पत्नी को जबाब देना पड़ता है , कुछ इसी तरह जी एस टी में केवल एक बिंदु पर टैक्स देना होगा . एक मैसेज आया कि जीएसटी में नमक पर टेक्स नही है , इसलिये सत्ता और विरोधी राजनीति एक दूसरे पर खूब नमक छिड़क रहे हैं . एक और मैसेज मिला कि जीएसटी में सस्ते हुये सामानो के लिये सरकार समर्थक फलाना चैनल देखिये , और महंगे हुये सामानो के लिये फलाना चैनल . खैर मैसेज तो बहुत से आप के पास भी आये होंगे , एक आखिरी मैसेज  शेयर कर रहा हूं ,जिससे आप जीएसटी को अच्छी तरह समझ सकें .  टीचर ने पूछा एक आम के पेड़ पर १२ केले लगे हैं , उनमें से ७ अमरूद तोड़ लिये गये तो बताओ कितने चीकू बचे ? छात्र ने उत्तर दिया सर ८ पपीते . शिक्षक ने कहा अरे वाह तुम्हें कैसे पता ? छात्र ने उत्तर दिया सर क्योकि मैं आज पराठे खाकर आया हूं . मारेल आफ दि स्टोरी यह है कि हमें रोज ब्रश करना चाहिये वरना जीएसटी की दरें  बढ़ सकती है .तो सारा देश जीएसटी को समझने में लगा है , आप भी समझिये . पर एक्साईज और सर्विस टैक्स के सुनहरे युग को मत भूलियेगा .

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