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शनिवार, 1 जुलाई 2017

rachna-prati rachna: ghanakshari

कार्यशाला: रचना-प्रति रचना 
घनाक्षरी  
फेसबुक
*
गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश
*
चमक-दमक साज-सज्जा मुख-मंडल पै
तड़क-भड़क भी विशेष होना चाहिए।
आत्म प्रचार की क्रिकेट का हो बल्लेबाज
लिस्ट कार्यक्रमों वाली पेश होना चाहिए।।
मछली फँसानेवाले काँटे जैसी शब्दावली
हीरो जैसा आकर्षक भेष होना चाहिए।
फेसबुक पर मित्र कैसे मैं बनाऊँ तुम्हे
फेसबुक जैसा भी तो फेस होना चाहिए।।
*
फेस 'बुक' हो ना पाए, गुरु यही बेहतर है 
फेस 'बुक' हुआ तो छुडाना मजबूरी है। 
फेस की लिपाई या पुताई चाहे जितनी हो
फेस की असलियत जानना जरूरी है।। 
फेस रेस करेगा तो पोल खुल जायेगी ही 
फेस फेस ना करे तैयारी जो अधूरी है।
फ़ेस देख दे रहे हैं लाइक पे लाइक जो 
हीरो जीरो, फ्रेंडशिप सिर्फ मगरूरी है।। 
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salil.sanjiv@gmail.com  

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