सोमवार, 17 जुलाई 2017

doha

दोहा सलिला
नाम अनाम
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पूर्वाग्रह पाले बहुत, जब रखते हम नाम
सबको यद्यपि ज्ञात है, आये-गये अनाम
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कैकेयी वीरांगना, विदुषी रखा न नाम
मंदोदरी पतिव्रता, नाम न आया काम
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रास रचाती रही जो, राधा रखते नाम
रास रचाये सुता तो, घर भर होता वाम
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काली की पूजा करें, डरें- न रखते नाम
अंगूरी रख नाम दें, कहें न थामो जाम
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कहते गांधारी सती, किन्तु न रखते नाम
रखा नहीं धृतराष्ट्र भी, नाम व्यर्थ बदनाम
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मिलतीं रंभा-उर्वशी, जैसे नारी आम
सद्गुण ए प्रति समर्पित, साध्य न पाया चाम
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अपनी अपनी सोच है, छिपी सोच में लोच
निज दुर्गुण देखें नहीं, पर गुण लखें न पोच
१७-७-२०१४,
salil.sanjiv@gmail.com
#दिव्यनर्मदा
#हिंदी_ब्लॉगर 

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