गुरुवार, 1 अक्तूबर 2015

kundalini

कुण्डलिनी:
आँखों में सपने हसीं, अधरों पर मुस्कान
सुख-दुःख की सीमा नहीं, श्रम कर हों गुणवान
श्रम कर हों गुणवान बनेंगे मोदी जैसे
बौने हो जायेंगे सुख सुविधाएँ पैसे
करें अनुसरण जग में प्रेरित मानव लाखों
श्रम से जय कर जग मुस्कायें आँखों-आँखों

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