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शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

secularism -sanjiv

sanjiv verma salil <salil.sanjiv@gmail.com>

 
महाभारतकार के अनुसार 'धर्मं स: धारयेत' -
जो धारण किया जाए वह धर्म है.
धारण क्या किया जाए?
वह जो श्रेष्ठ है.
श्रेष्ठ क्या है?
जो सबके लिए अनुकरणीय है.
धर्म का आशय कर्तव्य भी है,
विद्यार्थी का धर्म है पढ़ना आदि
'रिलीजन' का अर्थ 'धर्म' नहीं 'पंथ' या 'सम्प्रदाय' है.
  सेक्युलर= कांसेंट विथ द अफेयर्स ऑफ़ दिस वर्ल्ड, टेम्पोरल, लास्टिंग फॉर एजेस, ओकरिंग वन्स इन एन एज ऑर सेन्चुरी
सेक्युलरिज्म = डॉक्ट्रिन दैट द बेसिस ऑफ़ मोरलिटी शुड बी नॉन रिलीजिअस   -द लिटल ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी पृष्ठ ४५१
धर्म निरपेक्ष = कर्त्तव्य के प्रति उदासीन
धर्म सापेक्ष = कर्त्तव्य के प्रति सजग
पंथ निरपेक्ष = पंथ के प्रति उदासीन
पंथ सापेक्ष = पंथ के प्रति सजग, पंथ का सच्चा अनुयायी, अच्छा हिन्दू, अच्छा मुसलमान, अच्छा ईसाई आदि
सेक्युलर = टेम्पोरल, लौकिक, ऐहिक, सांसारिक, दुनियावी,
सेक्युलरिस्टिक = धर्म निरपेक्ष, धर्म विरुद्ध,
सेक्युलरिस्म = धर्मनिरपेक्षतावाद अंगरेजी-हिंदी कोष -फादर कामिल बुल्के, पृष्ठ ६०५

2 टिप्‍पणियां:

Anoop Bhargava ने कहा…

Anoop Bhargava

आदरणीय सलिल जी,

आभारी हूँ कि आपने इन शब्दों की परिभाषा देने की कोशिश की ...

यदि इन के अनुसार देखा जाये ...

तो

सेक्युलरिस्म = धर्मनिरपेक्षतावाद अंगरेजी-हिंदी कोष -फादर कामिल बुल्के, पृष्ठ ६०५
धर्म निरपेक्ष = कर्त्तव्य के प्रति उदासीन

अब यदि सेक्युलरिस्म अगर हमारे संविधान में है ( khalish ji may elaborate more on what is in the constiution and what is his interpretation of that)
तो क्या हमारा संविधान हमें ’कर्तव्य के प्रति उदासीन’ होने के लिये कह रहा है?

सादर
अनूप

Anoop Bhargava
732-407-5788 (Cell)
609-275-1968 (Home)

I feel like I'm diagonally parked in a parallel universe.

Visit my Hindi Poetry Blog at http://anoopbhargava.blogspot.com/
Visit Ocean of Poetry at http://kavitakosh.org/

gautamrb03@yahoo.com ने कहा…

gautamrb03@yahoo.com

आपकी सोच बहुत सार्थक है | धर्म को मनुष्य ने बनाया है न कि धर्म ने मनुष्य को बनाया है | सभी धर्म जनहित की रक्षा, शिक्षा, और उसे सही दिशा देने के लिए आवश्यक है बिना धर्म के भी इंसान जी सकता है |

आपने देवेन्द्र जी और ऐसी सोच रखने वालों की बात को विश्लेषण से लिखा; सुंदर लगा -अधर्म अनेक हो सकते हैं, रोग अनेक हो हो सकते हैं,
पर, धर्म सदा एक होता है !जैसे, स्वास्थ्य एक होता है,
आपको बहुत- बहुत साधुवाद !!!
सादर- गौतम