शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

bal kavita: gudiyon ka tyohaar - s.n.sharma 'kamal'

गुड़ियों का त्यौहार और नाग पंचमी पर एक बाल - गीत



कमल
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(गुड़िया का त्यौहार उत्तरप्रदेश के एक बड़े हिस्से में नागपंचमी के दिन मनाया जाता है। नागपंचमी के एक-दो दिन पहले से ही रंगीन डंडियां बिकनी शुरू हो जाती हैं। ये डंडियां लड़कों के लिए होती हैं। नाग पंचमी के दिन कपड़े की रंग-बिरंगी गुड़ियां बनाई जाती हैं। शायद उनमें उबले हुए चने इत्यादि भी भरे जाते हैं। शाम के वक्त सभी घरों से लड़कियां रंगीत डलियों या तश्तरियों में रंगीन कवर से अपनी-अपनी गुड़िया ढंककर मुहल्ले के चौराहे पर पहुंचती हैं। उनके साथ उनके भाई हाथों में पहले सी खरीदी डंडियां लेकर जाते है। सारी लड़कियों के इकट्ठा होने के बाद लड़कियां गोल घेरा बनाकर अपनी-अपनी गुड़िया घेरे के बीच में फेंक देती हैं । गुड़ियों के जमीन पर गिरते ही लड़के डंडियों से गुड़िया पीटने लगते हैं। इस अवसर पर चूंकि मुहल्ले के सारे बच्चे इकट्ठा होते हैं, इसलिए चाट, मिठाई और गुब्बारे वाले भी जमा हो जाते हैं। इसे कहते हैं नागपंचमी का मेला।)
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देर रात सोई थी जा कर
गुड्डे गुड़ियों को सजा धजा कर
सुबह हुई तो देखा आ कर
गुद्दे गुडियाँ नहीं वहाँ पर
कौन ले गया कहाँ गईं  वे
ढूँ ढ़ ढूंढ हारी मैं थक कर
चुन्नूमुन्नू जाग गए थे
तब उनसे ही पूछा जा कर
चुन्नू बोला तब हंस कर
गयी घूमने होंगी बाहर
समझ गई उसकी शैतानी
 गुस्सा आई बहुत  उसी   पर
मैंने भी  मन ही  मन उसको
सबक सिखा  देने की ठानी       
ऐसा मजा  चखाऊँगी की
उसको याद आजाये नानी
 उसका प्यारा एक खिलोना
ढोल बजाता खट ख़ट बौना
मैंने  उसे छुपा कर बेड   में
रख ऊपर ढक दिया बिछौना
याद  उसे  जब  आई उसकी  
ढूंढा  घर का कोना कोना
नहीं मिला जब उसे कहीं भी
शुरू कर दिया  रोना धोना
दीदी तुमने देखा क्या मेरा
ढोल बजाता हुआ खिलोना
मैं बोली बाहर चला गया हो
मेरी गुड़ियां लाने बौना
पैर  कर बोला दीदी देदो
गुड़ियां ला देता हूँ
आज ब्याह करना गुडिया का
गुड्डा खूब  सजा देता  हूँ 
फिर तो हम सबने मिल कर
गुड्डा गुडिया ब्याह रचाया
उसके बौने गैजेट  से ही
बहुत  देर बाजा बजवाया 
आज नाग-पंचमी भी है
बाहर एक सपेरा आया
बीन बजा कर नाग और
 नागिन का दर्शन  करवाया

पूरी कालोनी ने नागों पर
अपनी श्रद्धा भर भेंट चढ़ाया
हलवा पूरी और सिवैंये
खाया सबने त्यौहार मनाया
श्रावण शुक्ल पंचमी होती
गुड़ियों  नागों का त्यौहार
बच्चो सदा याद रखना तुम
इसे मनाना है हर बार
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sn Sharma <ahutee@gmail.com>
 

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