बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

muktak kavya

मुक्तक काव्य
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मुक्तक काव्य परंपरा संस्कृत से अन्दर भाषाओं ने ग्रहण की है। मुक्तक का वैशिष्ट्य अपने आप में पूर्ण होना है। उसका कथ्य  पहले या बाद के छंद से मुक्त रहता है। दोहा, रोला, सोरठा आदि द्विपदिक मुक्तक छंद हैं।
सवैया चतुष्पदिक मुक्तक छंद है। कुंडली षट्पदिक मुक्तक छंद है।
चतुष्पदिक मुक्तक में १. पहली, दूसरी, चौथी २. पहली-दूसरी, तीसरी-चौथी तथा ३. पहली-चौथी, दूसरी-तीसरी पंक्ति के
पदांत साम्य तीन तरह के शिल्प में रचना की जाती है। मुक्तक को तुक्तक, चौपदा, चौका आदि भी कहा गया है।
हिंदी मुक्तक में मात्रा-क्रम पर कम, मात्रा योग पर अधिक ध्यान दिया जाता है। तुकांत नहीं, पदांत साम्य आवश्यक है।
विराट जी के उक्त मुक्तक में पहली दो पंक्तियां १८ मात्रिक, बाद की दो १९ मात्रिक हैं। यह अपवाद है। सामान्यत: सब पंक्तियों में मात्रा-साम्य होता है।
हिंदी मुक्तक में लघु को दीर्घ, दीर्घ को लघु पढ़ने की छूट नहीं है, यह काव्य दोष है।
कुमार विश्वास के उक्त मुक्तक में यह दोष है।

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