रविवार, 25 फ़रवरी 2018

doha

दोहा
धरती मैया निरुपमा, धरती रूप अनूप
कभी किसी की कब हुई?, मरे जीत कर भूप
*
दोहे की महिमा अमित, कहते युग का सत्य
जो रचता संतुष्ट हो, मंगलकारी कृत्य
*
जीवन जी वन में कभी, देख जानवर मीत
कभी न माँगे जान वर, कोशिश करना रीत
*
होली हो ली, हो रही, होगी मानो मीत 
उन्मन तन-मन शांत हों, फागुन में कर प्रीत 
*
  

कोई टिप्पणी नहीं: