बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

haiku, sadoka, navgeet, doha, savaiya


विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर

- : समकालिक दोहा संकलन- "दोहा दुनिया" : -

विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में समकालिक दोहाकारों का प्रतिनिधि संकलन 'दोहा दुनिया १' शीघ्र ही प्रकाशित किया जाना है। संकलन में सम्मिलित प्रत्येक दोहाकार के १०० दोहे, चित्र, संक्षिप्त परिचय (नाम, जन्म तिथि व स्थान, माता-पिता, जीवनसाथी के नाम, शिक्षा, लेखन विधा, प्रकाशित कृतियाँ, पूरा पता, चलभाष, ईमेल आदि) १० पृष्ठों में प्रकाशित किया जाएगा। हर सहभागी के दोहों की संक्षिप्त समीक्षा तथा दोहा पर आलेख भूमिका में होगा। संपादन वरिष्ठ दोहाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' द्वारा किया जा रहा है। दोहे स्वीकृत होने पर प्रत्येक सहभागी को ३०००/- सहयोग राशि अग्रिम देना होगी। संकलन प्रकाशित होने पर विमोचन कार्यक्रम में हर सहभागी को सम्मान पत्र तथा ११ प्रतियाँ निशुल्क भेंट की जाएँगी। प्राप्त दोहों में आवश्यकतानुसार संशोधन का अधिकार संपादक को होगा। दोहे unicode में भेजने हेतु ईमेल- salil.sanjiv@gmail.com . चलभाष ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४
दोहा लेखन विधान: १. दोहा में दो पंक्तियाँ (पद) होती हैं। २. हर पद में दो चरण होते हैं। ३. विषम (पहला, तीसरा) चरण में १३-१३ तथा सम (दूसरा, चौथा) चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं। ४. तेरह मात्रिक पहले तथा तीसरे चरण के आरंभ में एक शब्द में जगण (लघु गुरु लघु) वर्जित होता है। ५. विषम चरणों की ग्यारहवीं मात्रा लघु हो तो लय भंग होने की संभावना कम हो जाती है। ६. सम चरणों के अंत में गुरु लघु मात्राएँ आवश्यक हैं। ७. हिंदी में खाय, मुस्काय, आत, भात, डारि जैसे देशज क्रिया रूपों का उपयोग न करें। ८. दोहा मुक्तक (अपने आप में पूर्ण) छंद है। कथ्य (जो बात कहना चाहें वह) एक दोहे में पूरी हो जाना चाहिए। ९. श्रेष्ठ दोहे में लाक्षणिकता, संक्षिप्तता, मार्मिकता (मर्मबेधकता), आलंकारिकता, स्पष्टता, लयबद्धता, पूर्णता तथा सरसता होना चाहिए। १०. दोहे में संयोजक शब्दों और, तथा, एवं आदि का प्रयोग न करें। ११. दोहे में कोई भी शब्द अनावश्यक न हो। हर शब्द ऐसा हो जिसके निकालने या बदलने पर दोहा न कहा जा सके। १२. दोहे में कारक का प्रयोग कम से कम हो। १३. दोहा में विराम चिन्हों का प्रयोग यथास्थान अवश्य करें। १४. दोहा सम तुकान्ती छंद है। सम चरण के अंत में समान तुक आवश्यक है। १५. दोहा में लय का महत्वपूर्ण स्थान है। लय के बिना दोहा नहीं कहा जा सकता। *****
मात्रा गणना नियम-१. किसी ध्वनि-खंड को बोलने में लगनेवाले समय के आधार पर मात्रा गिनी जाती है।२. कम समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की एक तथा अधिक समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की दो मात्राएं गिनी जाती हैंं।३. अ, इ, उ, ऋ तथा इन मात्राओं से युक्त वर्ण की एक मात्रा गिनें। उदाहरण- अब = ११ = २, इस = ११ = २, उधर = १११ = ३, ऋषि = ११= २, उऋण १११ = ३ आदि।४. शेष वर्णों की दो-दो मात्रा गिनें। जैसे- आम = २१ = ३, काकी = २२ = ४, फूले २२ = ४, कैकेई = २२२ = ६, कोकिला २१२ = ५, और २१ = ३आदि। ५. शब्द के आरंभ में आधा या संयुक्त अक्षर हो तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। जैसे गृह = ११ = २, क्षमा = १२ =३आदि।६. शब्द के मध्य में आधा अक्षर हो तो उसे पहले के अक्षर के साथ गिनें। जैसे- क्षमा १+२, वक्ष २+१, प्रिया १+२, विप्र २+१, उक्त २+१, प्रयुक्त = १२१ = ४ आदि। ७. रेफ को आधे अक्षर की तरह गिनें। बर्रैया २+२+२आदि। ८. हिंदी दोहाकार हिंदी व्याकरण नियमों का पालन करें। ९. अपवाद स्वरूप कुछ शब्दों के मध्य में आनेवाला आधा अक्षर बादवाले अक्षर के साथ गिना जाता है। जैसे- कन्हैया = क+न्है+या = १२२ = ५ आदि। १०. अनुस्वर (आधे म या आधे न के उच्चारण वाले शब्द) के पहले लघु वर्ण हो तो गुरु हो जाता है, पहले गुरु होता तो कोई अंतर नहीं होता। यथा- अंश = अन्श = अं+श = २१ = ३. कुंभ = कुम्भ = २१ = ३, झंडा = झन्डा = झण्डा = २२ = ४आदि। ११. अनुनासिक (चंद्र बिंदी) से मात्रा में कोई अंतर नहीं होता। धँस = ११ = २आदि। हँस = ११ =२, हंस = २१ = ३ आदि। मात्रा गणना करते समय शब्द का उच्चारण करने से लघु-गुरु निर्धारण में सुविधा होती है।

अब तक दोहा सहमत हुए सहभागियों के वर्ण क्रमानुसार नाम - सर्व श्री / श्रीमती

१. अनिल मिश्र
२.अरुण अर्णव खरे
३. अरुण शर्मा
४. कांति शुक्ल
५. छगनलाल गर्ग
६. छाया सक्सेना
७. जयप्रकाश श्रीवास्तव
८. बसंत शर्मा
९. मिथलेश बड़गैया
१०. लता यादव
११. विजय बागरी
१२. विश्वम्भर शुक्ल
१३. श्यामल सिन्हा
१४. शोभित वर्मा
१५. सरस्वती कुमारी
१६. सुनीता सिंह
१७. सुरेश तन्मय
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आज की रचना-

हाइकु
हिंदी का फूल
मैंने दिया, उसने
अंग्रेजी फूल।
*
सदोका
है चौकीदार
वफादार लेकिन
चोरियाँ होती रही।
लुटती रहीं
देश की तिजोरियाँ
जनता रोती रही।
*
नवगीत:
अंतर में
पल रही व्यथाएँ
हम मुस्काएँ क्या?
*
चौकीदार न चोरी रोके
वादे जुमलों को कब टोंके?
संसद में है शोर बहुत पर
नहीं बैंक में कुत्ते भौंके।
कम पहनें
कपड़े समृद्ध जन
हम शरमाएँ क्या?
*
रंग बदलने में हैं माहिर
राजनीति में जो जगजाहिर।
मुँह में राम बगल में छूरी
कुर्सी पूज रहे हैं काफिर।
देख आदमी
गिरगिट लज्जित
हम भरमाएँ क्या?
*
लोक फिर रहा मारा-मारा,
तंत्र कर रहा वारा-न्यारा।
बेच देश को वही खा रहे
जो कहते यह हमको प्यारा।।
आस भग्न
सांसों लेने को भी
तड़पाएँ क्या?
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दोहा
शुभ प्रभात अरबों लुटा, कहो रहो बेफिक्र।
चौकीदारी गजब की, सदियों होगा जिक्र।।
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पिया मेघ परदेश में, बिजली प्रिय उदास।
धरती सासू कह रही, सलिल बुझाए प्यास।।
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बहतरीन सर हो तभी, जब हो तनिक दिमाग।
भूसा भरा अगर लगा, माचिस लेकर आग।।
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नया छंद
जाति: सवैया
विधान: ८ मगण + गुरु लघु
प्रकार: २६ वार्णिक, ५१ मात्रिक छंद
बातों ही बातों में, रातों ही रातों में, लूटेंगे-भागेंगे, व्यापारी घातें दे आज
वादों ही वादों में, राजा जी चेलों में, सत्ता को बाँटेंगे, लोगों को मातें दे आज
यादें ही यादें हैं, कुर्सी है प्यादे हैं, मौका पा लादेंगे, प्यारे जो लोगों को आज
धोखा ही धोखा है, चौका ही चौका है, छक्का भी मारेंगे, लूटेंगे-बाँटेंगे आज
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