रविवार, 25 फ़रवरी 2018

doha kanta roy

दोहे- कांता रॉय 1. सुरा-पान ने कर दिया, कैसा तन का हाल हड्डी का ढाँचा बचा, पिचके सुन्दर गाल 2. दीन भटकता फिर रहा, अस्पताल में रीस खाने को रोटी नहीं, डॉक्टर माँगे फीस 3. सिगरेट फूँकी, सुरा पी, करता खुद से द्वेष अपनों का बैरी बना, करता नित्य कलेश 4. वायु सोखती प्रदूषण, पानी सोखे कीच मानव दुर्गुण सोखता, जीवन खींचमखींच 5. देख रूपैया मनुज भी, मन बिहुँसाये आप ज्यों कुत्ते के दिन फिरे, बने बाप के बाप
6.मृगतृष्णा जीवन-तृषा, कब पूरी हो आस?
जब तक तन में प्राण है, कब मिटती है प्यास?? 7.पानी तन की चाह है, पानी जीवन-राह पानी जीवन-सखा है, कौन गह सका थाह? 8. सूखी धरती राम की, सूखा हरि का गाँव पानी को मनु छल रहा, शेष न तरु की छाँव 9. गली-गली में लग गई, हैंडपम्प -तस्वीर बाहर कब तस्वीर से, आएगी तकदीर 10. बोतल-पानी पिलाती, नदी पाट सरकार आटा गीला हो रहा, मचता हाहाकार 11. खोज रहे हर दिशा में, बूँद-बूँद हम नीर टाल-तलैया पूरकर, बढ़ा रहे खुद पीर 12. जीव-जीव में प्रभु बसे, मानव का है धर्म दो अनाथ को आसरा, कर लो कुछ सत्कर्म
13. देव पधारे महल में, करें आरती भक्त देख दक्षिणा पुजारी, हुए अधिक अनुरक्त 14. प्याला पीकर प्रेम का, मधुशाला हो देह देख रही सुख नशे में, बिसरा मन का नेह 15. करे आचरण दोगला, बन पाखंडी संत मुँह में राम बगल रखे, छुरी बचाए कंत 16. होली पर्व अबीर का, खेलें सब चहुँ ओर काला रंग कलेश का, मत डालो बल-जोर 17. फागुन मौसम प्रीत का, बहे बसंत बयार पिचकारी ले हाथ में, प्रीतम है तैयार 18. फागुन गाए ताल दे, नाचे मन का मोर आया प्रियतम पाहुना, जिया धड़कता जोर 19. लड़ जीवन-संग्राम नित, बिन भला बिन तीर लड़ते-लड़ते जो जयी, वही सिकंदर वीर
२०.
मधुरम-मधुरम प्रेम है, जग-जीवन का सार
चख ले बंदे प्रेम रस, शेष सभी निस्सार
२१.
कौआ-कोयल श्याम हैं, श्यामल प्रीतम मौन
श्याम नयन कर चार चुप, बातें मन का काला चोर
नैनों से करें कन्हैया प्रीत की बतियाँ चार चार-चार में सोलह गुन-गुन काला जादू डार सुध-बुध खोकर राधा रोई लोक लाज सब त्याग यमुना तट पर पनघट पिघली सुन विरहा की राग राधा रोई पीपल रोया, रोया पेड़ कदम्ब वृंदावन में गैया रोयेे छूटे सब अवलम्ब


- : समकालिक दोहा संकलन- "दोहा दुनिया" : -


विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में समकालिक दोहकारों का प्रतिनिधि संकलन 'दोहा दुनिया १' शीघ्र ही प्रकाशित किया जा रहा है। संकलन में सम्मिलित प्रत्येक दोहाकार के १०० दोहे चित्र, संक्षिप्त परिचय (नाम, जन्म तिथि व स्थान, माता-पिता, जीवनसाथी के नाम, शिक्षा, लेखन विधा, प्रकाशित कृतियाँ, उपलब्धि, पूरा पता, चलभाष, ईमेल आदि) १० पृष्ठों में प्रकाशित किया जाएगा। हर सहभागी के दोहों की संक्षिप्त समीक्षा तथा दोहा पर आलेख भूमिका में होगा। संपादन वरिष्ठ दोहाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' द्वारा किया जा रहा है। दोहे स्वीकृत होने पर प्रत्येक सहभागी को ३०००/- सहयोग राशि अग्रिम देना होगी। संकलन प्रकाशित होने पर विमोचन कार्यक्रम में हर सहभागी को सम्मान पत्र तथा ११ प्रतियाँ निशुल्क भेंट की जाएँगी। प्राप्त दोहों में आवश्यकतानुसार संशोधन का अधिकार संपादक को होगा। दोहे unicode में भेजने हेतु ईमेल- salil.sanjiv@gmail.com . चलभाष ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४.
अब तक सम्मिलित किए गए सहभागियों के वर्ण क्रमानुसार नाम -
१. अनिल मिश्र २.अरुण अर्णव खरे ३. अरुण शर्मा ४. ओमप्रकाश शुक्ल ५. उदयभानु तिवारी मधुकर, ६.
४. छाया सक्सेना
५. जयप्रकाश श्रीवास्तव
६. बसंत शर्मा
७. मिथलेश बड़गैया
८. विजय बागरी
९. सुनीता सिंह
१०. सुरेश तन्मय, ११. छगनलाल गर्ग, १२. सरस्वती कुमारी, १२. लता यादव, १३. श्यामल सिन्हा, १४. प्रो. विशम्भर शुक्ला, १५. कांति शुक्ल. १६. उदयभानु तिवारी 'मधुकर', १७. आत्मप्रकाश
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दोहे- कांता रॉय 1. सुरा-पान ने कर दिया, कैसा तन का हाल हड्डी का ढाँचा बचा, पिचके सुन्दर गाल 2. दीन भटकता फिर रहा, अस्पताल में रीस खाने को रोटी नहीं, डॉक्टर माँगे फीस 3. सिगरेट फूँकी, सुरा पी, करता खुद से द्वेष अपनों का बैरी बना, करता नित्य कलेश 4. वायु सोखती प्रदूषण, पानी सोखे कीच मानव दुर्गुण सोखता, जीवन खींचमखींच 5. देख रूपैया मनुज भी, मन बिहुँसाये आप ज्यों कुत्ते के दिन फिरे, बने बाप के बाप
6.मृगतृष्णा जीवन-तृषा, कब पूरी हो आस?
जब तक तन में प्राण है, कब मिटती है प्यास?? 7.पानी तन की चाह है, पानी जीवन-राह पानी जीवन-सखा है, कौन गह सका थाह? 8. सूखी धरती राम की, सूखा हरि का गाँव पानी को मनु छल रहा, शेष न तरु की छाँव 9. गली-गली में लग गई, हैंडपम्प -तस्वीर बाहर कब तस्वीर से, आएगी तकदीर 10. बोतल-पानी पिलाती, नदी पाट सरकार आटा गीला हो रहा, मचता हाहाकार 11. खोज रहे हर दिशा में, बूँद-बूँद हम नीर टाल-तलैया पूरकर, बढ़ा रहे खुद पीर 12. जीव-जीव में प्रभु बसे, मानव का है धर्म दो अनाथ को आसरा, कर लो कुछ सत्कर्म
13. देव पधारे महल में, करें आरती भक्त देख दक्षिणा पुजारी, हुए अधिक अनुरक्त 14. प्याला पीकर प्रेम का, मधुशाला हो देह देख रही सुख नशे में, बिसरा मन का नेह 15. करे आचरण दोगला, बन पाखंडी संत मुँह में राम बगल रखे, छुरी बचाए कंत 16. होली पर्व अबीर का, खेलें सब चहुँ ओर काला रंग कलेश का, मत डालो बल-जोर 17. फागुन मौसम प्रीत का, बहे बसंत बयार पिचकारी ले हाथ में, प्रीतम है तैयार 18. फागुन गाए ताल दे, नाचे मन का मोर आया प्रियतम पाहुना, जिया धड़कता जोर 19. लड़ जीवन-संग्राम नित, बिन भला बिन तीर लड़ते-लड़ते जो जयी, वही सिकंदर वीर २०. मधुरम-मधुरम प्रेम है, जग-जीवन का सार चख ले बंदे प्रेम रस, शेष सभी निस्सार २१. कौआ-कोयल श्याम हैं, श्यामल प्रीतम हाय! श्याम नयन से कर रहा, बातें मन का काला चोर
नैनों से करें कन्हैया प्रीत की बतियाँ चार चार-चार में सोलह गुन-गुन काला जादू डार सुध-बुध खोकर राधा रोई लोक लाज सब त्याग यमुना तट पर पनघट पिघली सुन विरहा की राग राधा रोई पीपल रोया, रोया पेड़ कदम्ब वृंदावन में गैया रोयेे छूटे सब अवलम्ब


मात्रा गणना नियम-
१. किसी ध्वनि-खंड को बोलने में लगनेवाले समय के आधार पर मात्रा गिनी जाती है।
२. कम समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की एक तथा अधिक समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की दो मात्राएं गिनी जाती हैंं।
३. अ, इ, उ, ऋ तथा इन मात्राओं से युक्त वर्ण की एक मात्रा गिनें। उदाहरण- अब = ११ = २, इस = ११ = २, उधर = १११ = ३, ऋषि = ११= २, उऋण १११ = ३ आदि।
४. शेष वर्णों की दो-दो मात्रा गिनें। जैसे- आम = २१ = ३, काकी = २२ = ४, फूले २२ = ४, कैकेई = २२२ = ६, कोकिला २१२ = ५, और २१ = ३आदि।
५. शब्द के आरंभ में आधा या संयुक्त अक्षर हो तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। जैसे गृह = ११ = २, क्षमा = १२ =३आदि।
६. शब्द के मध्य में आधा अक्षर हो तो उसे पहले के अक्षर के साथ गिनें। जैसे- क्षमा १+२, वक्ष २+१, प्रिया १+२, विप्र २+१, उक्त २+१, प्रयुक्त = १२१ = ४ आदि।
७. रेफ को आधे अक्षर की तरह गिनें। बर्रैया २+२+२आदि।
८. हिंदी दोहाकार हिंदी व्याकरण नियमों का पालन करें।
९. अपवाद स्वरूप कुछ शब्दों के मध्य में आनेवाला आधा अक्षर बादवाले अक्षर के साथ गिना जाता है। जैसे- कन्हैया = क+न्है+या = १२२ = ५आदि।
१०. अनुस्वर (आधे म या आधे न के उच्चारण वाले शब्द) के पहले लघु वर्ण हो तो गुरु हो जाता है, पहले गुरु होता तो कोई अंतर नहीं होता। यथा- अंश = अन्श = अं+श = २१ = ३. कुंभ = कुम्भ = २१ = ३, झंडा = झन्डा = झण्डा = २२ = ४आदि।
११. अनुनासिक (चंद्र बिंदी) से मात्रा में कोई अंतर नहीं होता। धँस = ११ = २आदि।
हँस = ११ =२, हंस = २१ = ३ आदि।
मात्रा गणना करते समय शब्द का उच्चारण करने से लघु-गुरु निर्धारण में सुविधा होती है।
दोहा लिखना सीखिए;१. दोहा द्विपदिक छंद है। दोहा में दो पंक्तियाँ (पद) होती हैं।
२. हर पद में दो चरण होते हैं।
३. विषम (पहला, तीसरा) चरण में १३-१३ तथा सम (दूसरा, चौथा) चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं।
४. तेरह मात्रिक पहले तथा तीसरे चरण के आरंभ में एक शब्द में जगण (लघु गुरु लघु) वर्जित होता है।
५. विषम चरणों की ग्यारहवीं मात्रा लघु हो तो लय भंग होने की संभावना कम हो जाती है।
६. सम चरणों के अंत में गुरु लघु मात्राएँ आवश्यक हैं।
७. हिंदी में खाय, मुस्काय, आत, भात, डारि जैसे देशज क्रिया रूपों का उपयोग न करें।
८. दोहा मुक्तक छंद है। कथ्य (जो बात कहना चाहें वह) एक दोहे में पूर्ण हो जाना चाहिए।
९. श्रेष्ठ दोहे में लाक्षणिकता, संक्षिप्तता, मार्मिकता (मर्मबेधकता), आलंकारिकता, स्पष्टता, पूर्णता तथा सरसता होना चाहिए।
१०. दोहे में संयोजक शब्दों और, तथा, एवं आदि का प्रयोग न करें।
११. दोहे में कोई भी शब्द अनावश्यक न हो। हर शब्द ऐसा हो जिसके निकालने या बदलने पर दोहा न कहा जा सके।
१२. दोहे में कारक का प्रयोग कम से कम हो।
१३. दोहा में विराम चिन्हों का प्रयोग यथास्थान अवश्य करें।
१४. दोहा सम तुकान्ती छंद है। सम चरण के अंत में समान तुक आवश्यक है।
१५. दोहा में लय का महत्वपूर्ण स्थान है। लय के बिना दोहा नहीं कहा जा सकता।
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- : समकालिक दोहा संकलन- "दोहा दुनिया" : -

विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में समकालिक दोहकारों का प्रतिनिधि संकलन 'दोहा दिनकर १' शीघ्र ही प्रकाशित किया जा रहा है। संकलन में सम्मिलित प्रत्येक दोहाकार के १०० दोहे चित्र, संक्षिप्त परिचय (नाम, जन्म तिथि व स्थान, माता-पिता, जीवनसाथी के नाम, शिक्षा, लेखन विधा, प्रकाशित कृतियाँ, उपलब्धि, पूरा पता, चलभाष, ईमेल आदि) १० पृष्ठों में प्रकाशित किया जाएगा। हर सहभागी के दोहों की संक्षिप्त समीक्षा तथा दोहा पर आलेख भूमिका में होगा। संपादन वरिष्ठ दोहाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' द्वारा किया जा रहा है। दोहे स्वीकृत होने पर प्रत्येक सहभागी को ३०००/- सहयोग राशि अग्रिम देना होगी। संकलन प्रकाशित होने पर विमोचन कार्यक्रम में हर सहभागी को सम्मान पत्र तथा ११ प्रतियाँ निशुल्क भेंट की जाएँगी। प्राप्त दोहों में आवश्यकतानुसार संशोधन का अधिकार संपादक को होगा। दोहे unicode में भेजने हेतु ईमेल- salil.sanjiv@gmail.com . चलभाष ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४.
अब तक सम्मिलित किए गए सहभागियों के वर्ण क्रमानुसार नाम -
१. अनिल मिश्र
२.अरुण अर्णव खरे
३. अरुण शर्मा
४. छाया सक्सेना
५. जयप्रकाश श्रीवास्तव
६. बसंत शर्मा
७. मिथलेश बड़गैया
८. विजय बागरी
९. सुनीता सिंह
१०. सुरेश तन्मय, ११. छगनलाल गर्ग, १२. सरस्वती कुमारी, १२. लता यादव, १३. श्यामल सिन्हा, १४. प्रो. विशम्भर शुक्ला, १५. कांति शुक्ल. १६. उदयभानु तिवारी 'मधुकर', १७. आत्मप्रकाश
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मात्रा गणना नियम-
१. किसी ध्वनि-खंड को बोलने में लगनेवाले समय के आधार पर मात्रा गिनी जाती है।
२. कम समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की एक तथा अधिक समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की दो मात्राएं गिनी जाती हैंं।
३. अ, इ, उ, ऋ तथा इन मात्राओं से युक्त वर्ण की एक मात्रा गिनें। उदाहरण- अब = ११ = २, इस = ११ = २, उधर = १११ = ३, ऋषि = ११= २, उऋण १११ = ३ आदि।
४. शेष वर्णों की दो-दो मात्रा गिनें। जैसे- आम = २१ = ३, काकी = २२ = ४, फूले २२ = ४, कैकेई = २२२ = ६, कोकिला २१२ = ५, और २१ = ३आदि।
५. शब्द के आरंभ में आधा या संयुक्त अक्षर हो तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। जैसे गृह = ११ = २, क्षमा = १२ =३आदि।
६. शब्द के मध्य में आधा अक्षर हो तो उसे पहले के अक्षर के साथ गिनें। जैसे- क्षमा १+२, वक्ष २+१, प्रिया १+२, विप्र २+१, उक्त २+१, प्रयुक्त = १२१ = ४ आदि।
७. रेफ को आधे अक्षर की तरह गिनें। बर्रैया २+२+२आदि।
८. हिंदी दोहाकार हिंदी व्याकरण नियमों का पालन करें।
९. अपवाद स्वरूप कुछ शब्दों के मध्य में आनेवाला आधा अक्षर बादवाले अक्षर के साथ गिना जाता है। जैसे- कन्हैया = क+न्है+या = १२२ = ५आदि।
१०. अनुस्वर (आधे म या आधे न के उच्चारण वाले शब्द) के पहले लघु वर्ण हो तो गुरु हो जाता है, पहले गुरु होता तो कोई अंतर नहीं होता। यथा- अंश = अन्श = अं+श = २१ = ३. कुंभ = कुम्भ = २१ = ३, झंडा = झन्डा = झण्डा = २२ = ४आदि।
११. अनुनासिक (चंद्र बिंदी) से मात्रा में कोई अंतर नहीं होता। धँस = ११ = २आदि।
हँस = ११ =२, हंस = २१ = ३ आदि।
मात्रा गणना करते समय शब्द का उच्चारण करने से लघु-गुरु निर्धारण में सुविधा होती है।


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