गुरुवार, 14 मार्च 2019

सामयिक दोहे-सोरठे

सामयिक दोहे * वादों को जुमला कहें, जुमले बिसरा चौंक धूल आज कल झौंकते, आँखों में वे भौंक * देशभक्ति के नाम पर, सेना का उपयोग हाय! सियासत कर रही, रोको बढ़े न रोग * जो मुखिया उसको नहीं, उचित रखे मन बैर है सबका सबके लिए, माँगे सबकी खैर * इसने उसकी बात की, उसने इसकी बात बात न कर्म करते रहे दोनों ही आघात * मुखिया जो परिवार का, वही करे यदि भेद उसकी गलती के लिए, कौन करेगा खेद? सामयिक सोरठे * एक न अगर विपक्ष, तब समझ सूपड़ा साफ़ सत्ताधारी दक्ष, पटक-कुचल देगा सम्हल * दली जा रही दाल, छाती छप्पन इंच पर बिगड़ रहे हैं हाल, हार सन्निकट देखकर * कहिए जिनपिंग संग, झूला झूले क्या मिला? दावत खाने आप, गए पाक हारा किला * बजा रहा है बीन, पाकिस्तानी आजकल भूल गया है चीन, डँसता सर्प न छोड़ता * नष्ट हुआ शिवराज, घोटाले नव नित्य कर खोज रहा है ताज, जुमलेबाजी कर नयी * उनकी है यह चाह, हो विपक्ष बाकी नहीं तज देंगे वह राह, जहाँ सुरा-साकी नहीं? * उसके जैसा दीन, दुनिया में कोई नहीं। भ्रमवश वह है चीन महाशक्ति कहते जिसे।। *

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