गुरुवार, 28 मार्च 2019

कार्यशाला- निवाला

कार्य शाला 
विषय: निवाला 
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त्रिपदी: हाइकु 
निवाला मिला
ईश्वर का आभार 
भुला दो गिला। 
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त्रिपदी: माहिया 
प्रभु की हो कृपा जिस पर 
उसे मिलता निवाला है 
कर शुक्रिया खा मानव 
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* मुक्तक * 
निवाला मिला नहीं तो चाह निवाला। 
निवाला मिला तो कहा वाह निवाला।। 
निवाला पा भूख बढ़ी डाह निवाला। 
निवाला छीना तो हुआ आह निवाला।।
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दोहा 
जीव जीव का निवाला, विधि का यही विधान। 
जोड़ रहे धन-संपदा, दो दिन के मेहमान।। 
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कुण्डलिया 
भूख-निवाला का निभा, जन्म-जन्म का साथ। 
जीना इनके साथ ही, रहो मिलाकर हाथ।।
रहो मिलाकर हाथ, तभी तो खैर रहेगी। 
तनहाई में भूख, अधिक ही तुम्हें डँसेगी।।
रहना यदि संजीव, न करना गड़बड़ झाला। 
सलिल लगे जब भूख, निगलना तभी निवाला।। 
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