शुक्रवार, 29 मार्च 2019

चित्र पर लेखन

समस्यापूर्ति
चित्र पर लेखन















हाइकु

हँसिया लिए
बुराई से जूझती
भलाई जीती
*
निर्भय नारी
नहीं रही कोमल
तीक्ष्ण कटारी
*
माहिया

गोदी में सोई है
नन्हीं सी आशा
सपनों में खोई है
*
तुम दया न दिखलाना
दुष्टों पर मैया!
पानी को तरसाना
*
पताका

पा
मैया
से रक्षा,
सुता हुई
नींद में लीन।
सपने देखती
आने वाले कल के
गढ़ेगी नया भारत
सब होंगे सुखी संपन्न।
*

सोरठा

कर बुराई से बैर, अबला सबला हो गई,
अब न रहेगी खैर, कहाँ छिपा है दुशासन
*
ममतामय कर एक, दूजे में हथियार ले
पूर्ण करेगी टेक, अपराधी को मार कर
*
हो भविष्य निश्चिन्त, वर्तमान की गोद में
नींद ले सके कंत!, रखना इसका ख़याल तुम
*
अनाचार को देख, दुर्गा से काली हुई
शक्ति समय कर लेख, दुष्ट न अब बाकि बचें
*
संवस
७९९९५५९६१८
२९-३-२०१९



कोई टिप्पणी नहीं: