बुधवार, 13 मार्च 2019

बुंदेली रचनाएँ: संजीव

बुंदेली नवगीत 
*
१. नाग, साँप, बिच्छू भय ठाँड़े 
  • *
    नाग, साँप, बिच्छू भय ठाँड़े,

    धर संतन खों भेस।
    *
    हात जोर रय, कान पकर रय,
    वादे-दावे खूब।
    बिजयी हो झट कै दें जुमला,
    मरें नें चुल्लू डूब।।
    की को चुनें, नें कौनउ काबिल, 
    सरम नें इनमें लेस।
    *
    सींग मार रय, लात चला रय, 
    फुँफकारें बिसदंत।
    डाकू तस्कर चोर बता रय, 
    खुद खें संत-महंत।
    भारत मैया हाय! नोच रइ
    इनैं हेर निज केस।
    *
    जे झूठे, बे लबरा पक्के, 
    बाकी लुच्चे-चोर।
    आपन मूँ बन रय रे मिट्ठू, 
    देख ठठा रय ढोर।
    टी वी पे गरिया रय
    भत्ते बढ़वा, लोभ असेस।
    ***
    २. राम रे!
  • *
    राम रे! 
    कैसो निरदै काल?
    *
    भोर-साँझ लौ गोड़ तोड़ रए 
    कामचोर बे कैते। 
    पसरे रैत ब्यास गादी पै 
    भगतन संग लपेटे। 
    काम पुजारी गीता बाँचें 
    गोपी नचें निढाल-
    आँधर ठोंके ताल 
    राम रे! 
    बारो डाल पुआल। 
    राम रे! 
    कैसो निरदै काल?
    *
    भट्टी देह, न देत दबाई
    पैलउ माँगें पैसा। 
    अस्पताल मा घुसे कसाई 
    थाने अरना भैंसा। 
    करिया कोट कचैरी घेरे 
    बकरा करें हलाल-
    बेचें न्याय दलाल 
    राम रे !
    लूट बजा रए गाल। 
    राम रे! 
    कैसो निरदै काल?
    *
    झिमिर-झिमिर-झम बूँदें टपकें 
    रिस रओ छप्पर-छानी। 
    दागी कर दई रौताइन की 
    किन नें धुतिया धानी?
    अँचरा ढाँके, सिसके-कलपे 
    ठोंके आपन भाल 
    राम रे !
    जीना भओ मुहाल। 
    राम रे! 
    कैसो निरदै काल?
  • ***
  • ३. हम का कर रए
  • हम का कर रए?
    जे मत पूछो,
    तुम का कर रए
    जे बतलाओ?
    *
    हमरो स्याह सुफेद सरीखो
    तुमरो धौला कारो दीखो
    पंडज्जी ने नोंचो-खाओ
    हेर सनिस्चर भी सरमाओ
    घना बाज रओ थोथा दाना
    ठोस पका
    हिल-मिल खा जाओ
    हम का कर रए?
    जे मत पूछो,
    तुम का कर रए
    जे बतलाओ?
    *
    हमरो पाप पुन्न सें बेहतर
    तुमरो पुन्न पाप सें बदतर
    होते दिख रओ जा जादातर
    ऊपर जा रओ जो बो कमतर
    रोन न दे मारे भी जबरा
    खूं खें आँसू
    चुप पी जाओ
    हम का कर रए?
    जे मत पूछो,
    तुम का कर रए
    जे बतलाओ?
  • ***
  • अभिनव प्रयोग:
  • ४. होरा भूँज रओ
    *
    होरा भूँज रओ छाती पै 

    आरच्छन जमदूत 

    पैदा होतई बनत जा रए 

    बाप बाप खें, पूत 

    *

    लोकनीति बनबास पा रई 

    राजनीति सिर बैठ 

    नाच नचाउत नित तिगनी खों 

    घर-घर कर घुसपैठ 

    नाम आधुनिकता को जप रओ 

    नंगेपन खों भूत 

    *

    नींव बगैर मकान तान रय  

    भौत सयाने लोग 

    त्याग-परिस्रम खों तलाक दें

    मनो चाह रय भोग 

    फूँक रए रे, मिली बिरासत 

    काबिल भए सपूत 

    *

    ईंट-ईंट में खेंच दिवारें 

    तोड़ रए हर जोड़ 

    लाज-लिहाज कबाड़ बता रए 

    बेसरमी हित होड़ 

    राह बिसर कें राह दिखा रओ 

    सयानेपन खों भूत

    **
    • *
    • भारतवारे बड़े लड़ैया
      बिनसें हारे पाक सियार
      .
      घेर लओ बदरन नें सूरज
      मचो सब कऊँ हाहाकार
      ठिठुरन लगें जानवर-मानुस
      कौनौ आ करियो उद्धार
      बही बयार बिखर गै बदरा
      धूप सुनैरी कहे पुकार
      सीमा पार छिपे बनमानुस
      कबऊ न पइयो हमसें पार
      .
      एक सिंग खों घेर भलई लें
      सौ वानर-सियार हुसियार
      गधा ओढ़ ले खाल सेर की
      देख सेर पोंके हर बार
      ढेंचू-ढेचूँ रेंक भाग रओ
      करो सेर नें पल मा वार
      पोल खुल गयी, हवा निकर गयी
      जान बखस दो करें पुकार
      .
      (प्रयुक्त छंद: आल्हा, रस: वीर, भाषा रूप: बुंदेली)
  • ५. भारतवारे बड़े लड़ैया
  • *
  • कओ बाद में, सोचो पैले।
  • मन झकास रख, कपड़े मैले।। 
  • *
  • रैदासों सें कर लई यारी।
  • रुचें नें मंदिर पंडित थैले।।
  • *
  • शीश नबा लओ, हो गओ पूजन।
  • तिलक चढ़ोत्री?, ठेंगा लै ले।।
  • *
  • चाहत हो पीतम सें मिलना?
  • उठो! समेटो, नाते फैले।।
  • *
  • जोड़ मरे, जा रए छोड़कर
  • लिए मनुज तन, बे थे बैले।।
  • ***
      • ९.बुन्देली नवगीत :
    • जुमले रोज उछालें
      *
      संसद-पनघट
      जा नेताजू
      जुमले रोज उछालें।
      *
      खेलें छिपा-छिबौउअल,
      ठोंके ताल,
      लड़ाएं पंजा।
      खिसिया बाल नोंच रए,
      कर दओ
      एक-दूजे खों गंजा।
      खुदा डर रओ रे!
      नंगन सें
      मिल खें बेंच नें डालें।
      संसद-पनघट
      जा नेताजू
      जुमले रोज उछालें।
      *
      लड़ें नई,मैनेज करत,
      छल-बल सें
      मुए चुनाव।
      नूर कुस्ती करें,
      बढ़ा लें भत्ते,
      खेले दाँव।
      दाई भरोसे
      मोंड़ा-मोंडी
      कूकुर आप सम्हालें। 
      संसद-पनघट
      जा नेताजू
      जुमले रोज उछालें।
      *
      बेंच सिया-सत,
      करें सिया-सत।
      भैंस बरा पे चढ़ गई।
      बिसर पहाड़े,
      अद्धा-पौना
      पीढ़ी टेबल पढ़ रई। 
      लाज तिजोरी
      फेंक नंगई
      खाली टेंट खंगालें।
      संसद-पनघट
      जा नेताजू
      जुमले रोज उछालें।
      *
      भारत माँ की
      जय कैबे मां
      मारी जा रई नानी।
      आँख कें आँधर
      तकें पड़ोसन
      तज घरबारी स्यानी।
      अधरतिया मदहोस
      निगाहें मैली
      इत-उत-डालें।
      संसद-पनघट
      जा नेताजू
      जुमले रोज उछालें।
      *
      पाँव परत ते
      अंगरेजन खें,
      बाढ़ रईं अब मूँछें।
      पाँच अंगुरिया
      घी में तर 
      सर हाथ
      फेर रए छूँछे।
      बचा राखियो
      नेम-धरम खों
      बेंच नें
      स्वार्थ भुना लें।
      ***
  • बुन्देली मुक्तिका:
  • हमाये पास का है?.
  • *
  • हमाये पास का है जो तुमैं दें?
  • तुमाये हात रीते तुमसें का लें?
  • आन गिरवी बिदेसी बैंक मां है
  • चोर नेता भये जम्हूरियत में।।
  • रेत मां खे रए हैं नाव अपनी
  • तोड़ परवार अपने हात ही सें।।
  • करें गलती न मानें दोष फिर भी
  • जेल भेजत नें कोरट अफसरन खें।।
  • भौत है दूर दिल्ली जानते पै
  • हारियो नें 'सलिल मत बोलियों टें।।
  • ***
  • बुंदेली दोहा सलिला 


    *

    जब लौं बऊ-दद्दा जिए, भगत रए सुत दूर

    अब काए खों कलपते?, काए हते तब सूर?
    *
    खूबई तौ खिसियात ते, दाबे कबऊं न गोड़
    टँसुआ रोक न पा रए, गए डुकर जग छोड़
    *
    बने बिजूका मूँड़ पर, झेलें बरखा-घाम
    छाँह छीन काए लई, काए बिधाता बाम
    *
    ए जी!, ओ जी!, पिता जी, सुन खें कान पिराय
    'बेटा' सुनबे खों जिया, हुड़क-हुड़क अकुलाय
  •  
    • १०. मुक्तिका बुंदेली में
  • *
    पाक न तन्नक रहो पाक है?
    बाकी बची न कहूँ धाक है।।
    *
    सूपनखा सें चाल-चलन कर
    काटी अपनें हाथ नाक है।।
    *
    कीचड़ रहो उछाल हंस पर
    मैला-बैठो दुष्ट काक है।।
    *
    अँधरा दहशतगर्द पाल खें
    आँखन पे मल रओ आक है।।
    *
    कल अँधियारो पक्का जानो
    बदी भाग में सिर्फ ख़ाक है।।
    *
    पख्तूनों खों कुचल-मार खें
    दिल बलूच का करे चाक है।।
    *
     

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