बुधवार, 27 मार्च 2019

गीत

सच्ची बात
*
मेरे घर में हो प्रकाश
तेरा घर बने मशाल
*
मेरा अनुभव है  यही
पैमाने हैं दो।
मुझको रिश्वत खूब दो
बाकी मगर न लो
मैं तेरा रखता न पर
तू मेरा रखे खयाल
मेरे घर में हो प्रकाश
तेरा घर बने मशाल
*
मेरे घर हो लक्ष्मी,
तेरे घर काली
मुझसे ले मत, दे मुझे
तू दहेज-थाली
तेरा नत, मेरा रहे
हरदम ऊँचा भाल
मेरे घर में हो प्रकाश
तेरा घर बने मशाल
*
तेरा पुत्र शहीद हो
मेरा अफसर-सेठ
तेरी वाणी नम्र हो
मैं दूँ गाली ठेठ
तू मत दे, मैं झटक लूँ
पहना जुमला-माल
मेरे घर में हो प्रकाश
तेरा घर बने मशाल
*
संवस, ७९९९५५९६१८

कोई टिप्पणी नहीं: