बुधवार, 13 मार्च 2019

क्षणिका मौन

क्षणिका
मौन
*
बिन बोले ही बोलता
सुन सकते
हर बात।
दिन हो
चाहे रात
फर्क इसे पड़ता नहीं।
बोलो
हो तुम कौन
कभी नहीं यह पूछता?
वन-पर्वत या
हो शहर
बतियाता है मौन।
***
संवस

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