मंगलवार, 9 अक्तूबर 2018

geet

गीत:
प्रेम समर्पण
शील निगम
मैनचेस्टर, इंग्लैण्ड * आशाओं के दर्पण में हसरतों का स्नेह भरा तर्पण,
२२२ २ २११ २ १११२ २ २१ १२ २११ = ३१ कामिनी काया के कम्पन में थिरकता प्रेम-समर्पण.
२१२ २२ २ २११ २ १११२ २१ १२११ = ३० कंचन-कोमल आत्मा में बसा आत्मविभोर सा मन, २८ बंद कमल में ज्यों आसक्त भ्रमर का प्रेम भरा तन. २८ आँखों में बसा समंदर का ज्वार,पलकों में थिरकन, २९ पलकों की चिलमन से झाँके असुअन की तड़पन २६

आलिंगन से बाँध कर छोड़ गए अधूरा सा तन, २८ घूँघट में सिंदूरी कपोल दमकते, चुम्बन की सिहरन, ३१ कंगन, चूड़ी चमक रही, बंद सी हुई दिल की धड़कन, ३० तरस-तरस, बरस-बरस कर राह तकें थके चितवन. २७ आशाओं के दर्पण में हसरतों का स्नेह भरा तर्पण, कामिनी काया के कम्पन में थिरकता प्रेम-समर्पण. **

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