रविवार, 28 अक्तूबर 2018

चंचरीक स्मरणांजलि

आँसू बहे न एक,
चंचरीक को याद कर।
मिले प्रेरणा नेक,
प्रभु से नित फरियाद कर।।
*
जगमोहन को मोह जग,
सका नहीं थक-हार।
नतमस्तक हो देखता,
रहा भक्ति का ज्वार।।

प्रभु की कृपा अहैतुकी,
पाई सतत अनंत।
साक्षी धरती ही नहीं,
रवि-शशि दिशा-दिगंत।।

श्वास-श्वास हरि-नाम जप,
रचा अमर साहित्य।
भाव बिंब रस छंदमय,
बन अक्षर आदित्य।।

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