गुरुवार, 4 अक्तूबर 2018

karya shala- doha / rola / kundaliya

कार्यशाला- दोहा / रोला / कुण्डलिया ​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​
*
मन डूबा ही जा रहा,​ ​भावों भरा अपार​​
बोझ तले है दब गया,​ ​दुनिया है व्यापार।।​ -शशि त्यागी
दुनिया है व्यापार, न क्या ईश्वर सौदागर?
भटकाता है जनम-जनम क्यों कर यायावर
घाट न घर का रहे जीव, भटके हो उन्मन
भाव भरा संसार, जा रहा है डूबा मन​ -संजीव वर्मा 'सलिल' ​
*

कोई टिप्पणी नहीं: