शनिवार, 1 दिसंबर 2018

कुण्डलिया

कार्य शाला:
दोहा से कुण्डलिया 
*
बेटी जैसे धूप है, दिन भर करती बात।
शाम ढले पी घर चले, ले कर कुछ सौगात।।  -आभा सक्सेना 'दूनवी' 

लेकर कुछ सौगात, ढेर आशीष लुटाकर।
बोल अनबोले हो, जो भी हो चूक भुलाकर।। 
रखना हरदम याद, न हो किंचित भी हेटी। 
जाकर भी जा सकी, न दिल से प्यारी बेटी।। -संजीव वर्मा 'सलिल'
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१.१२.२०१८ 

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