शनिवार, 29 दिसंबर 2018

वातायन उमरिया २५-१२-२०१८

साहित्य समाचार:
वातायन उमरिया का १५ वां वार्षिकोत्सव संपन्न 



उमरिया, २५.१२.२०१८। उमरिया जिले की साहित्यिक क्षेत्र की अग्रणी साहित्यिक संस्था वातायन के पंद्रहवे स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न आयोजन किए गए। कार्यक्रम में जबलपुर, कटनी, शहडोल, अनूपपुर जिलों से श्रेष्ठ-ज्येष्ठ साहित्यकारों ने सहभागिता का आयोजन की गरिमा-वृद्धि की।

स्वागत सत्र:

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. नीलमणि दुबे (विभागाध्यक्ष हिंदी, शासकीय महाविद्यालय शहडोल) रहीं। अध्यक्ष की आसंदी को जबलपुर के मनीषी छंदाचार्य संजीव वर्मा "सलिल" (सेवानिवृत कार्यपालन अभियंता) ने सुशोभित किया। अतिथि वक्ता डॉ. राकेश सोनी, प्राध्यापक दर्शनशास्त्र, अमरकंटक विश्वविद्यालय एवं प्रसिद्ध नवगीतकार राजा अवस्थी, कटनी ने मंच की गरिमा वृद्धि की। अध्यक्ष व् अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, स्तुति गायन एवं संस्था के जनक स्व. रामनरेश मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का का श्री गणेश हुआ। पुष्पहारों से अतिथि स्वागत पश्चात् संस्था सचिव अनिल कुमार मिश्र द्वारा संस्था की गतिविधियों, उद्देश्य आदि की जानकारी दी गई।

सम्मान सत्र:

श्रीमती विनीता श्रीवास्तव शिक्षिका-कवयित्री जबलपुर को सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवदान हेतु शिक्षक राजकुमार महोबिया द्वारा पिता छोटेलाल महोबिया की स्मृति में प्रदत्त "वातायन वागीश सम्मान" प्रदान किया गया। स्व. विक्रम सिंह की स्मृति में स्थापित "वातायन सौरभ सम्मान" अमरकंटक के डॉ. राकेश सोनी को रामलखन सिंह चौहान एवं उनके अग्रज ने प्रदान किया। स्व. महेश सिंह की स्मृति में उनके अनुज करन सिंह, शिक्षक द्वारा स्थापित "वातायन पीयूष सम्मान" से बल्हौड़ जिला उमरिया के विद्वान् रामनिहोर तिवारी को "कबीर" पर महत्वपूर्ण कार्य हेतु सम्मानित किया गया। वातायन के संस्थापक पं. रामनरेश मिश्र की स्मृति में वर्ष २००६ से स्थापित "वातायन सुमन सम्मान" शहडोल के वरिष्ठ गीतकार अवधप्रताप शरण सेवा निवृत्त प्राचार्य को साहित्यिक अवदान के लिए अनिल कुमार मिश्र के द्वारा प्रदान किया गया।

कृति विमोचन-लोकार्पण सत्र:

अध्यक्ष महोदय व अतिथि विद्वानों द्वारा संस्थाध्यक्ष श्री अनिल मिश्र द्वारा संपादित काव्य संकलन 'इंद्रधनुष, रामचंद्र प्रसाद कर्ण बीरसिंहपुर पाली रचित काव्य संकलन 'शब्दांजलि', कैलाश 'शिवेन्द्र' ब्यौहारी द्वारा लिखित काव्य संग्रह 'धरती के आँसू' एवं कहानी संग्रह 'सफ़र' का विमोचन किया गया। विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में शांतिराज पुस्तक मालांतर्गत प्रकाशित दोहा शतक मंजूषा के ३ भागों 'दोहा-दोहा नर्मदा', 'दोहा सलिला निर्मला' तथा 'दोहा दीप्त दिनेश' तथा आचार्य संजीव वर्मा 'सैलिल ले नवगीत संग्रह 'सड़क पर' का लोकार्पण किया गया।

परिचर्चा सत्र:

डॉ. राकेश सोनी ने 'स्व. रामनरेश मिश्र और उनका कविता संसार' विषय पर बोलते हुए कहा कि मिश्र जी का काव्य संसार वृहद स्वरूप ग्रहण किये हुए है इनके काव्य कौशल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि सहज सरल शब्दों में जन की बात को जन जन तक पहुँचाने में सफल दिखायी देते हैं।

नवगीतकार राजा अवस्थी ने 'कविता के बदलते स्वरूप' पर कहा की कविता की यही विशेषता है कि वह किसी कालखंड में बंधकर नहीं रहती | यह समय के अनुसार अपना रूप बदलती रहती है।जायसी, तुलसी, केसव, कबीर, रहीम, मीरा, सूर से चलती हुई कविता आज छंदमुक्त और नवगीत तक आकर और अधिक मुखर हुई है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. नीलमणि दुबे ने मानस और श्रुतिओं के साथ कविता के रस लालित्य को लोककल्याणकारिता का मुख्य कारक निरूपित किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य सलिल वर्मा "सलिल" ने सम्मानित जनों के नामों को समाहित करते हुए उनके सम्मान में दोहा समर्पित किया- 'राम निहोरे विनीता, अवध-शरण राकेश। / पूर्ण इंदु सम नीलमणि, शाट वंदन सलिलेश।।' आशुकवित्व प्रतिभा का परिचय देते हुए सलिल जी ने विमोचित-लोकार्पित कृतियों को दो दोहों से सम्मानित किया- 'धरती के आँसू' लिए, 'इंद्रधनुष' के रंग। / 'सफर' 'सड़क पर' कर रहे, शब्दांजलि के संग।।' तथा 'दोहा-दोहा नर्मदा, दोहा दीप्त दिनेश। / दोहा सलिला निर्मला, आशा-किरण प्रदेश।।' विद्वान वक्ता ने 'काव्य के आवश्यक तत्व और सौंदर्य-बोध' पर प्रकाश डालते हुए जन सामान्य के मन में सत्य-शिव-सुन्दर के प्रति आस्था-दीप जलाये रखना ऐसे आयोजनों का लक्ष्य व सफलता माना। उन्होंने नर्मदांचल के साहित्यकारों द्वारा की जा रही साहित्य साधना को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आभार प्रदर्शन संस्था अध्यक्ष श्रीश चन्द्र भट्ट एवं सञ्चालन संतोष द्विवेदी द्वारा किया गया।

काव्य पाठ सत्र:

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में जबलपुर से पधारे सुकवि बसंत शर्मा की अध्यक्षता, नवगीतकार विजय बागरी कटनी के मुख्यातिथ्य एवं कैलाश शिवेन्द्र ब्यौहारी के विशेष आतिथ्य में आमंत्रित कवियों संजीव वर्मा 'सलिल', राजा अवस्थी, विनीता श्रीवास्तव, अशोक अवधिया, नागेन्द्र नाथ तिवारी, रामचंद्र प्रसाद कर्ण, बसंत शर्मा, विजय बागरी, कैलाश शिवेंद्र और उमरिया प्रतिनिधि के रूप में वातायन के संरक्षक एम. ए. सिद्दीकी ने रचना पाठ किया। कार्यक्रम में अभय पांडे, गेंदन सिंह, गोपाल गुमसुम, मकसूद खान नियाजी, मृगेंद्र सिंह, पी के सिंह, बसर जी, चिम्मन लाल जी, शिवानन्द पटेल, सूर्य प्रकाश गौतम, धीरज सोनी, ओंकारनाथ अग्रवाल, श्रवण चतुर्वेदी, मकरंद प्रसाद मिश्र, शेख धीरज, नागेन्द्र मिश्र, जावेद खान, सुरेश अवधिया, पारस नाथ शर्मा, राम विशाल गुप्ता, पुष्प राज सिंह, प्रदीप रजक, शेख उस्मान, याकूब खान, शंकर प्रसाद बर्मन, सत्येन्द्र गौतन, महेश अजनबी, भूपेन्द्र त्रिपाठी आदि प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही , कार्यक्रम का संचालन राजकुमार महोबिया एवं आभार प्रदर्शन शम्भू सोनी के द्वारा किया गया।

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