शनिवार, 8 दिसंबर 2018

वीणावादिनी वंदना

काव्यानुवाद
वीणावादिनी वंदना
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सकल सुरासुर सामिनी, सुणि माता सरसत्ति।
विनय करीन इ वींनवूं, मुझ तउ अविरल मत्ति।।
(संवत १६७७, ढोल मारू दा दोहा से)
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सुरसुरों की स्वामिनी, सुनें शारदा मात।
विनय करूँ सर नवा दो, निर्मल मति सौगात।।

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