शुक्रवार, 21 दिसंबर 2018

यमकीय दोहे

यमकीय दोहे  : 
'माँग भरें' वर माँगकर, गौरी हुईं प्रसन्न 
वर बन बौरा माँग भर, हुए अधीन- न खिन्न 
*
तिल-तिल कर जलता रहा, तिल भर किया न त्याग 
तिल-घृत की चिंताग्नि की, सहे सुयोधन आग
*
चमक कैमरे ले रहे, जहाँ-तहाँ तस्वीर
दुर्घटना में कै मरे,जानो कर तदबीर
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घट ना फूटे सम्हल जा, घट ना जाए मूल 
घटना यदि घट जाए तो, व्यर्थ नहीं दें तूल
*
बख्शी को बख्शी गयी, जैसे ही जागीर
थे फकीर कहला रहे, पुरखे रहे अमीर
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नम न हुए कर नमन तो, समझो होती भूल 
न मन न तन हो समन्वित, तो चुभता है शूल
*
ठाकुर जी सिर झुकाकर, करते नम्र प्रणाम 
ठाकुर जी मुस्का रहे, आज पड़ा फिर काम
*
गए दवाखाना तभी, पाया यह संदेश 
भूल दवा खाना गए, खा लें था निर्देश
*
मन उन्मन मत हो पुलक, चल चिलमन के गाँव
चिलम न भर चिल रह 'सलिल', तभी मिले सुख-छाँव
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नाहक हक ना त्याग तू, ना हक पीछे भाग 
ना ज्यादा अनुराग रख, ना हो अधिक विराग
*

1 टिप्पणी:

Jyoti Khare ने कहा…

बहुत सुंदर दोहे
सादर