गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

मुक्तिका गैट वैल सून

मुक्तिका 
गैट वैल सून
*
गैट वैल सून 
दे दुश्मन को भून 

नेता करते रोज 
लोकतंत्र का खून 

कुछ तो हालत बदल 
कुतर नहीं नाखून 

खा मेहनत के बाद 
हँस रोटी दो जून 

कोशिश बिना सलिल 
मिलता नहीं सुकून 


बन मत अफलातून 
गैट वैल सून 
***
७.२.१९१० 

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