शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

संस्था परिचय
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विश्ववाणी हिंदी संस्थान
समन्वय अभियान जबलपुर
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२० अगस्त १९७४ को समन्वय संस्था को हिंदी भाषा-साहित्य तथा राष्ट्रीय भाव के संवर्धन हेतु आरंभ किया गया। प्रथम गोष्ठी में अध्यक्ष श्रद्धेय ब्योहार राजेंद्र सिंह जी तथा मुख्य अतिथि ख्यात कवि रामेश्वर शुक्ल 'अञ्चल' ने आशीष प्रदान किया। २५ जून १९७५ को आपातकाल लगने से २१ मार्च १९७७ को आपात काल के समापन के मध्य सदस्यों ने लोकतांत्रिक चेतना जगाने के लिए निरंतर गोष्ठियाँ कीं।  सर्व श्री दादा धर्माधिकारी, द्वारका प्रसाद मिश्र, सत्येंद्र मिश्र, गणेश प्रसाद नायक, कालिका प्रसाद दीक्षित 'कुसुमाकर, वल्लभ दास जैन, बद्रीनाथ गुप्ता आदि के मार्गदर्शन में कुमार संजीव, राजेश जैन 'वत्सल', श्रीकांत पटेरिया अनूप सोलहा आदि ने प्रशासनिक दमन के विरोध में निरंतर लेखन किया तथा जन जागरण का लक्ष्य लेकर लोकनायक व्याख्यानमाला (गांधी जयंती २ अक्टूबर से जयप्रकाश जयंती ८ अक्टूबर) का वार्षिक आयोजन शहीद स्मारक में किया। इस रचनात्मक आंदोलन को नई दिशा मिली डॉ. रामजी सिंह भागलपुर, श्रीमती इंदुमती केलकर तथा यदुनाथ थत्ते से।  आपातकाल के समापन के बाद हुए आम चुनाव  सदस्यों ने सर्व दलीय प्रत्याशी श्री शरद यादव की विजय सुनिश्चित कर अपनी भूमिका साहित्य सृजन तक सीमित कर ली। 
१९८० में अनियतकालीन सामाजिक पत्रिका चित्राशीष का प्रकाशन आरंभ हुआ। १५-९-१९८१ को अभियान जबलपुर के अन्तर्गत साहित्यिक-सामाजिक गतिविधियों तथा समन्वय प्रकाशन के अंतर्गत को प्रकाशन  संबंधी गतिविधियां संचालित की जाने लगीं। अभियंता दिवस १९८३ पर सामूहिक काव्य संकलन निर्माण के नूपुर तथा १९८५ में नींव के पत्थर का प्रकाशन किया गया। १९८६ से १९९० तक पत्रिका यांत्रिकी समय का प्रकाशन श्री कुलदेव मिश्रा के साथ मिलकर किया गया। नवलेखन गोष्ठियों के माध्यम से सदस्यों के लेखन को परिमार्जित करने के प्रयास चलते रहे। वर्ष १९९६ से १९९८ तक पत्रिका इंजीनियर्स टाइम्स का प्रकाशन किया गया। वर्ष २००० में समन्वय अभियान की प्रतिष्ठापरक प्रस्तुति तिनका-तिनक नीड़ को व्यापक सराहना मिली। वर्ष २००२ से २००८ तक नर्मदा पत्रिका का प्रकाशन किया गया। 
दिव्य नर्मदा अलंकरण:
१७ मार्च १९९७ को अखिल भारतीय दिव्य नर्मदा अलंकरण समारोह के के मुख्य अतिथि श्री शिवकुमार श्रीवास्तव कुलपति सागर विश्व विद्यालय रहे। श्री चंद्र सेन विराट इंदौर, स्व. शंभूरत्न दुबे तथा श्री प्रबोध गोविल जयपुर को उत्कृष्ट लेखन हेतु पाँच-पाँच हजार रुपये के पुरस्कार भेंट किये गए। १० अगस्त १९९८ को दिव्य नर्मदा अलंकरण समारोह में श्री अनंत राम मिश्र गोला गोकर्ण नाथ, श्री भगवान दास श्रीवास्तव इंदौर,  श्रीमती सुधा रानी श्रीवास्तव जबलपुर, राजेश अरोरा 'शलभ' लखनऊ, श्री मनोहर काजल दमोह, डॉ, सुशीला टाकभौरे नागपुर, ओमप्रकाश यति सोनभद्र, शांति शेठ अहमदाबाद, डॉ. रमेश खरे दमोह, डॉ. ए. जे अब्राहम कुरुविल्ला केरल, आचार्य भगवद दुबे जबलपुर तथा डॉ. शकुंतला चौधरी जबलपुर  को विविध विधाओं में श्रेष्ठ लेखन हेतु ५-५ हजार रूपए के तीन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।  बसंत पंचमी १० फरवरी २००० के अवसर पर दिव्य नर्मदा अलंकरण समारोह का आयोजन मंडला में किया गया। आचार्य भगवद दुबे जबलपुर, डॉ. चंद्रपाल चेन्नई, शिवानंद कंडे दुर्ग, चन्द्रसेन विराट ीांडौर, गिरिमोहन गुरु होशंगाबाद, रामप्रताप खरे भोपाल। शिव गुलाम केहरि हरदोई, चित्रभूषण श्रीवास्तव 'विदग्ध' मंडला, रत्न लाल वर्मा जमीरपुर हिमाचल प्रदेश, गोमती प्रसाद 'विकल' रीवा, विजय जोशी कोटा, केदारनाथ मुजफ्फरपुर, सुमन जेतली मुरादाबाद पुरस्कृत किये गए। ३० जनवरी २००१ को नैनपुर में संपन्न समारोह में डॉ. श्यामनन्द सरस्वती 'रोशन' दिल्ली, डॉ. एन. चंद्रशेखरन नायर तिरुवनंतपुरम, चन्द्रसेन विराट इंदौर, जसपाल सिंह 'संप्राण' अम्बाला, अनंत राम मिश्र गोला गोकर्णनाथ, वीरेंद्र खरे अकेला 'छतरपुर, प्रो देवी सिंह चौहान रायपुर, रसिक लाल परमार करेली, डॉ. गार्गी शरण मिश्र 'मारआल जबलपुर, राम गोपाल भावुक डबरा, रजनी सक्सेना छतरपुर, मेजर मुनवा सिंह चौहान लखनऊ, चेतन भारती रायपुर को पुरस्कृत किया गया। उम्र की पगडंडियों पर स्व. राजेंद्र श्रीवास्तव तथा माता-ए-परवीन परवीन हक़ का विमोचन संपन्न हुआ।
७ नवंबर २००२ को दिव्य नर्मदा अलंकरण का प्रतिष्ठा परक आयोजन लखनऊ में महामहिम राज्यपाल आचार्य विष्णुकांत शास्त्री के मुख्यातिथ्य, विधान सभाध्यक्ष श्री केशरी नाथ त्रिपाठी, व्यंग्यकार पद्म श्री के. पी. सक्सेना,  ग़ज़ल सम्राट श्री कृष्ण बिहारी 'नूर',  नरेश सक्सेना अध्यक्ष मुक्तिबोध सृजन पीठ व सीमा रिज़वी राज्य मंत्री सूचना प्रौद्योगिकी के विशिष्टातिथ्य तथा महापौर पद्म श्री डॉ. एम्. सी. राय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। आचार्य पूनम चंद्र तिवारी ग्वालियर, आचार्य भगवत प्रसाद मिश्र अहमदाबाद, राजेश अरोरा 'शलभ' लखनऊ, चंद्र सेन विराट इंदौर, गिरीश सिन्हा 'जीवन' जौनपुर, अशोक गीते खंडवा, रसूल अहमद सागर बकाई जालौन, राम प्रसाद विमोही रायपुर, संध्या जैन 'श्रुति' जबलपुर, गोपीनाथ कालभोर खंडवा, राज सागरी जबलपुर, डॉ. गार्गी शरण मिश्र जबलपुर, वंश बहादुर यादव धनबाद, आर्य प्रहलाद गिरी आसनसोल सम्मनित किये गए। मीत मेरे संजीव 'सलिल', सौरभ: डॉ. श्याम सुन्दर हेमकार, कदाचित सुभाष पांडेय, ऑफ़ एन्ड ऑन अनिल जैन, तथा पहला कदम डॉ. अनूप निगम का विमोचन शास्त्री जी के कर कमलों से हुआ।
वर्ष २००३ में श्री मनमोहन दुबे जबलपुर, डॉ. रजनीकांत जोशी अहमदाबाद, जसपाल 'संप्राण' अंबाला, मनोज श्रीवास्तव लखनऊ, राजेंद्र नागदेव दिल्ली, डॉ. शरद मिश्र शहडोल, श्री कृष्णवल्लभ पौराणिक इंदौर, मेजाओ राहुल शर्मा बेलगाम, डॉ. शेषपाल सिंह 'शेष' आगरा, डॉ. रमेश खरे दमोह, श्री रविशंकर परसाई पिपरिया, डॉ. बाबू जोसफ कोट्टायम केरल, डॉ. कृष्ण गोपाल मिश्र होशंगाबाद, डॉ. रामनारायण पटेल भुक्ता उड़ीसा, सदाशिव कौतुक इंदौर, ज्ञानेंद्र साज़ अलीगढ, विजय राठौड़ जांजगीर, डॉ. ब्रम्हजीत गौतम भोपाल, देवीसिंह चौहान रायपुर, खिश्ना मणि चतुर्वेदी गौसे सिनसपुर, श्री बद्री प्रसाद परसाई पिपरिया, श्रीमती रत्न ओझा जबलपुर, महेश जोशी खरगोन,. डॉ. ओमप्रकाश हयारण झांसी, महेंद्र सिंह 'नीलम' वाराणसी, उमेश अग्रवाल कोरबा, जितेंद्र प्रसाद 'भिखारी' वाराणसी, गिरिजा शंकर पाठक 'गिरिजेश' बीकानेर, कल्पना शील बड़ौदा, जयनारायण वैरागी झांबा, सत्या पूरी नाहन, अमृत लाल मालवीय होशंगाबाद, अरुम इंग्ले भोपाल तथा तोमर सिंह साहू कुरुद पुरस्कृत किये गए। समारोह २९.३.२००३ को महामहिम केदारनाथ साहनी राज्यपाल गोवा के मुख्यातिथ्य तथा न्यायमूर्ति अजित कब्बिन कर्णाटक उच्च न्यायालय व ओमप्रकाश पुलिस महानिरीक्षक कर्णाटक  के विशेषातिथ्य व वीर राजेंद्र सिंह 'बाफना' अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष महावीर इंटरनेशनल की अध्यक्षता में हुआ। 
१४.९.२००४ को साहित्य मंडल नाथद्वारा में चंद्र सेन विराट इंदौर, डॉ. सुशीला कपूर भोपाल, रुद्रदत्त दुबे जबलपुर, सरिता अग्निहोत्री मंडला, महाकवि जगमोहन प्रसाद चंचरीक जयपुर, डॉ. बी. इस. जौहरी - डॉ. पुष्प जौहरी मुम्बई, आचार्य भगवत दुबे जबलपुर, अज़ीज़ अंसारी इंदौर, श्याम विद्यार्थी डिब्रूगढ़, रामेश्वर हरिद मंडला, करुणा श्रीवास्तव जयपुर, प्रूराम साहू धमतरी, गजानन सिंह चौहान मंडलेश्वर, महेश सक्सेना भोपाल, रमेश बेल बालाघाट, ममता सिंह बीकानेर, त्रिभुवन सिंह चौहान लखनऊ, सुगन चंद जैन 'नलिन' गुना, विजय राठौर जांजगीर, शशिकांत पशीने 'शाकिर' अमरावती, रमेश चौरसिया 'राही' कोरबा, कैलाश त्रिपाठी ओरैया, दयाराम गुप्त पथिक ब्योहारी, गिरिमोहन गुरु होशंगाबाद, लक्ष्मी शर्मा जबलपुर, जगदीश जोशीला खरगौन, प्रभा पन्द्र 'पुरनम' जबलपुर, मणि मुकुल जबलपुर, ओमप्रकाश हयारण झांसी तथा डॉ. ओमप्रकाश लखनऊ को सम्मानित किया गया। मुख्या अतिथि प्रसिद्ध  साहित्यकार नरेंद्र कोहली दिल्ली तथा अध्यक्ष श्री नरहर ठाकर मुख्य पुजारी श्री नाथद्वारा मन्दिर रहे।
वर्ष २००६ में दिव्य नर्मदा अलंकरणों का आयोजन खंडवा में किया गया।
पुस्तक मेला:
१ से १० जनवरी २००० तक नगर में प्रथम पुस्तक मेले का आयोजन समय प्रकाशन दिल्ली के सहयोग से कराया गया जिसका उद्घाटन महापौर विश्वनथ दुबे ने किया, मुख्य अतिथि विधान सभा उपाध्यक्ष  ईश्वर दास रोहाणी  थे। २९-९-२००१ से ५-१०-२००१ तक नगर में पहली बार ग्रामीण तकनीकी विकास व्यापार मेला कृषि उपज मंडी में आयोजित किया गया।
वास्तु विद्या सम्मेलन:
१२-१४ जनवरी २००२ को मानस भवन में वास्तु विद्या सम्मेलन का आयोजन वास्तु विज्ञान संस्थान के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन श्री सुदर्शन सरसंघ चालक, भाई महावीर राज्यपाल म.प्र. व् महापौर विश्वनाथ दुबे के कर कमलों से हुआ।
      

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