रविवार, 10 मार्च 2019



चार मुक्‍तक

(प्रो.सी़.बी. श्रीवास्‍तव ‘‍ विदग्ध ’  ए १ , शिलाकुंज, नयागांव जबलपुर )


धृणा,द्वेष और बैर रख ही चलता पाकिेस्‍तान है
अपने हर व्‍यवहार में वह सदा से बेईमान है।
हमारी सद्भाव की सब कोशिशें निष्‍फल हुई
उसे अपनी दुष्‍टता पर ही रहा अभिमान है।।


सद्भाव के बदले भी जिसका शत्रुता का आचरण
उस कृतघ्नी प्रति हो कैसे क्रोध का अब संवरण?
दिया जिसने दगा नित उस पर  भला कैसा  भरोसा।
किया जाना उचित उसका इस समय निर्मम दमन।।

राष्‍ट्र की बलि वेदी पर जो हो गये अनुपम हवन
उन शहीदों को हमारा अश्रुपूरित शतशत नमन।
है प्रबल आक्रोश हर एक मन यही है चाहता
इस बढ़े आतंक का अब चाहिये निर्मम दमन।।


    ले लिया पुलवामा का बदला भी हमने खून से
कोई उलझे व्‍यर्थ न अब मेरे हिन्‍दुस्‍तान से।
  समझ लें दुश्‍मन सभी इस समय की सच्‍चाई को
करेगा जो शत्रुता वह जायेगा अब जान से।।



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