बुधवार, 23 मई 2018

नवगीत

एक रचना
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अधर पर मुस्कान   १०
नयनों में निमंत्रण,  ११
हाथ में हैं पुष्प,         १०
मन में शूल चुभते,    ११
बढ़ गए पेट्रोल के फिर भाव,   १७
जीवन हुआ दूभर।     ११
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ओ अमित शाही इरादों!  १४
ओ जुमलिया जूठ-वादों! १४
लूटते हो चैन जन का      १४
नीरवों के छिपे प्यादों!     १४
जिस तरह भी हो न सत्ता  १४
हाथ से जाए।          ९
कुर्सियों में जान    १०
संसाधन स्व-अर्पण,  ११
बात में टकराव,         १०
धमकी खुली देते,    ११
धर्म का ले नाम, कर अलगाव,   १७
खुद को थोप ऊपर।     ११
बढ़ गए पेट्रोल के फिर भाव,   १७
जीवन हुआ दूभर।     ११
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रक्तरंजित सरहदें क्यों?   १४
खोलते हो मैकदे क्यों?    १४
जीविका अवसर न बढ़ते १४
हौसलों को रोकते क्यों?   १४
बात मन की, ध्वज न दल का १४
उतर-छिन जाए।     ९
लिया मन में ठान    १०
तोड़े आप दर्पण,      ११
दे रहे हो घाव,         १०
नफरत रोज सेते,    ११
और की गलती गिनाकर मुक्त,   १७
ज्यों संतुष्ट शूकर।     ११
बढ़ गए पेट्रोल के फिर भाव,   १७
जीवन हुआ दूभर।     ११
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२३-५-२०१८

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