शनिवार, 19 जनवरी 2013

ग़ज़ल: रहनुमा चाहिए - ओमप्रकाश तिवारी

ग़ज़ल:
रहनुमा चाहिए
 - ओमप्रकाश तिवारी 
*
(सीमा पर दो जवानों के सिर कटने के सप्ताह भर बाद हमारे प्रधानमंत्री ने मुंह खोले । उन्हें मुबारकबाद देते हुए एक तुकबंदी प्रस्तुत है)

रहनुमा चाहिए

रहनुमा चाहिए मुंह में ज़ुबान हो जिसके ,
दिल में थोड़ा ही सही पर ईमान हो जिसके ।

हम हैं तैयार बहाने को लहू भी अपना ,
सिर्फ दो बूंद पसीने की आन हो जिसके ।

हमारे साथ जो घर अपना जला सकता हो,
इस रिआया पे खुदा मेहरबान हों जिसके ।

नहीं है राम का युग ना यहां गांधी कोई ,
फिर भी दो-चार सही कद्रदान हों जिसके ।

कोई किसी को निवाले नहीं देता आकर ,
किंतु नीयत में तो अमनो-अमान हो जिसके ।

चलेगी जात-पांत बात-बुराई सारी ,
जेहन में घूमता हिंदोस्तान हो जिसके । 

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Om Prakash Tiwari
Chief of Mumbai Bureau
Dainik Jagran
Om Prakash Tiwari <omtiwari24@gmail.com>
41, Mittal Chambers, Nariman Point, Mumbai- 400021Tel : 022 30234900 /30234913/39413000Fax : 022 30234901M : 098696 49598

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