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मंगलवार, 15 जनवरी 2013

गीत: आओ! आँख मिचौली खेलें... संजीव 'सलिल'

चित्र पर कविता रचें:



गीत:
आओ! आँख मिचौली खेलें...
संजीव 'सलिल'
*
जीवन की आपाधापी में,
बहुत थक गए, ऊब गए हम।
भूल हँसी, मस्ती, खुशियों को,
व्यर्थ फ़िक्र में डूब गए हम।
छोड़ें सारा काम, चलो अब
और न हम बेबस तन ठेलें,
आओ! आँख मिचौली खेलें...
*
टीप-रेस, कन्ना-कौड़ी हो,
कंचे, चीटी-धप मत भूलें।
चढ़ें पेड़ पर झूला डालें,
ऊंची पेंग बढ़ा नभ छू लें।
बात और की भी  मानें कुछ,
सिर्फ न अपनी अपनी पेलें-
आओ! आँख मिचौली खेलें...
*
मिस्टर-मिसेज, न अंकल-आंटी,
गुइयाँ, साथी, सखा, सहेली।
भूलें मैनर, हाय-हलो भी- 
पूछें-बूझें मचल पहेली।
सुना चुटकुले, लगा ठहाके,
भुज-पाशों में कसकर लेलें -
आओ! आँख मिचौली खेलें...
*

 

 

1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रवीण पाण्डेय

बच्चों सा बन बच्चों की ऊर्जा हम भी पा लें।