बुधवार, 15 अगस्त 2018

doha pacheli

दोहा पचेली में
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ठाँड़ी खेती खेत में, जब लौं अपनी नांय।
गाभिन गैया ताकियो, जब लौं नई बिआय।।

नीलकंठ कीरा भखैं, हमें दरस से काम।
काथरिन खों फेंकें नई, चिलरन भले तमाम।।
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बाप न मारी लोखरी, बीटा तीरंदाज।
बात मम्योरे की करें, मामा से तज लाज।।
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पानी में रै कहें करें, बे मगरा सें बैर।
बैठो मगरा-पीठ पे, बानर करबे सैर।।
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घर खों बैरी ढा रओ, लंका कैसो पाप।
कूकुर धोए बच्छ हो, कबऊँ न बचियो आप।।

६.८.२०१८ 
  

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