गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

kundali, shashi purwar-sanjiv

एक कुंडली- दो रचनाकार
दोहा: शशि पुरवार
रोला: संजीव
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सड़कों के दोनों तरफ, गंधों भरा चिराग 
गुलमोहर की छाँव में, फूल रहा अनुराग
फूल रहा अनुराग, लीन घनश्याम-राधिका 
दग्ध कंस-उर, हँसें रश्मि-रवि श्वास साधिका 
नेह नर्मदा प्रवह, छंद गाती मधुपों के 
गंधों भरे चिराग, प्रज्वलित हैं सड़कों के 
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