मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

chhand-bahar


ॐ 
छंद बहर का मूल है: ६  
*
छंद परिचय:
संरचना: SIS ISI S
SI SIS IS 
सूत्र: रजतरलग।
चौदह वार्णिक शर्करी जातीय            छंद।
बाईस मात्रिक महारौद्र जातीय          छंद।
बहर: फ़ाइलुं मुफ़ाइलुं फ़ाइलुं मुफ़ाइलुं।
*
देश-गीत गाइए, भेद भूल जाइए
सभ्यता महान है, एक्य-भाव लाइए 
*
कौन था कहाँ रहा?, कौन है कहाँ बसा?
सम्प्रदाय-लिंग क्या?, भूल साथ आइए
 *
प्यार-प्रेम से रहें, स्नेह-भाव ही गहें 
भारती समृद्ध हो, नर्मदा नहाइए
 *
दीन-हीन कौन है?, कार्य छोड़ मौन जो
देह देश में बनी, देश में मिलाइए
 *
वासना न साध्य है, कामना न लक्ष्य है 
भोग-रोग-मुक्त हो, त्याग-राग गाइए
*
ज्ञान-कर्म इन्द्रियाँ, पाँच तत्व देह है  
गह आत्म-आप का, आप में खपाइए 
*
भारतीय-भारती की उतार आरती
भव्य भाव भव्यता, भूमि पे उतरिये
***
१८.४.२०१७ 
*** 

कोई टिप्पणी नहीं: