रविवार, 23 अप्रैल 2017

chhand-bahar 11

ॐ 
छंद बहर का मूल है: १० 
*
छंद परिचय:
संरचना: SIS SSI SS / SISS SISS
सूत्र: रतगग।
आठ वार्णिक अनुष्टुप जातीय छंद।
चौदह मात्रिक मानव जातीय सखी छंद।
बहर: 
फ़ाइलातुं फ़ाइलातुं ।
*
आप बोलें या न बोलें
सत्य खोलें या न खोलें  

*
फैसला है आपका ही
प्यार के हो लें, न हो लें 


कीजिए भी काम थोड़ा 
नौकरी पा के, न डोलें
*
दूर हो विद्वेष सारा
स्नेह थोड़ा आप घोलें   

*
तोड़ दें बंदूक-फेंकें
नैं आँसू से भिगो लें 

*
बंद हो रस्मे-हलाला  
औरतें भी सांस ले लें 
*
काट डाले वृक्ष लाखों 
हाथ पौधा एक ले लें 
***
२३.४.२०१७
***

ॐ 
छंद बहर का मूल है: ११  
*
छंद परिचय:
संरचना: SIS S
सूत्र: रगग।
पाँच वार्णिक सुप्रतिष्ठा जातीय  छंद।
नौ मात्रिक आंक  जातीय गंग छंद।
बहर: 
फ़ाइलातुं फ़े ।
*
भावनाएँ हैं
कामनाएँ हैं   

*
आदमी है तो
वासनाएँ  हैं 


हों हरे वीरां  
योजनाएँ हैं
*
त्याग की बेला 

दाएँ-बाएँ हैं  
*
आप ही पालीं
आपदाएँ हैं 

*
आदमी जिंदा   
वज्ह माएँ हैं 
*
औरतें ही तो 
वंदिताएँ हैं  
***

२३.४.२०१७
***
ॐ 
छंद बहर का मूल है: ११  
*
छंद परिचय:
संरचना: SIS S
सूत्र: रगग।
पाँच वार्णिक सुप्रतिष्ठा जातीय  छंद।
नौ मात्रिक आंक  जातीय गंग छंद।
बहर: 
फ़ाइलातुं फ़े ।
*
भावनाएँ हैं
कामनाएँ हैं   

*
आदमी है तो
वासनाएँ  हैं 


हों हरे वीरां  
योजनाएँ हैं
*
त्याग की बेला 

दाएँ-बाएँ हैं  
*
आप ही पालीं
आपदाएँ हैं 

*
आदमी जिंदा   
वज्ह माएँ हैं 
*
औरतें ही तो 
वंदिताएँ हैं  
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२३.४.२०१७
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