शनिवार, 26 सितंबर 2015

shlesh alankar

: अलंकार चर्चा  ११ :  

श्लेष अलंकार

भिन्न अर्थ हों शब्द के, आवृत्ति केवल एक
अलंकार है श्लेष यह, कहते सुधि सविवेक

 किसी काव्य में एक शब्द की एक आवृत्ति में एकाधिक अर्थ होने पर श्लेष अलंकार होता है. श्लेष का अर्थ 'चिपका हुआ' होता है. एक शब्द के साथ एक से अधिक अर्थ संलग्न (चिपके) हों तो वहाँ श्लेष अलंकार होता है.

उदाहरण:
१.  रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून
    पानी गए न ऊबरे, मोती मानस चून
    इस दोहे में पानी का अर्थ मोती  में 'चमक', मनुष्य के संदर्भ में  सम्मान, तथा चूने के सन्दर्भ में पानी है.

२. बलिहारी नृप-कूप की, गुण बिन बूँद न देहिं
    राजा के साथ गुण का अर्थ सद्गुण तथा कूप के साथ रस्सी है.

३. जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं, यह जानत सब कोइ
    गाँठ तथा रस के अर्थ गन्ने तथा मनुष्य के साथ क्रमश: पोर व रस तथा मनोमालिन्य व प्रेम है.

४. विपुल धन, अनेकों रत्न हो साथ लाये
    प्रियतम! बतलाओ लाला मेरा कहाँ है?
    यहाँ लाल के दो अर्थ मणि तथा  संतान हैं.

५. सुबरन को खोजत फिरैं कवि कामी अरु चोर
     इस काव्य-पंक्ति में 'सुबरन' का अर्थ क्रमश:सुंदर अक्षर, रूपसी तथा स्वर्ण हैं.

 ६. जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय
    बारे उजियारौ करै, बढ़े अँधेरो होय
    इस दोहे में बारे = जलाने पर तथा बचपन में, बढ़े = बुझने पर, बड़ा होने पर

७. लाला ला-ला कह रहे, माखन-मिसरी देख
     मैया नेह लुटा रही, अधर हँसी की रेख
    लाला = कृष्ण, बेटा तथा मैया - यशोदा, माता (ला-ला = ले आ, यमक)

८.  था आदेश विदेश तज, जल्दी से आ देश
    खाया या कि सुना गया, जब पाया संदेश
    संदेश = खबर, मिठाई (आदेश = देश आ, आज्ञा यमक)

९. बरसकर
    बादल-अफसर
    थम गये हैं.
    बरसकर =  पानी गिराकर, डाँटकर

१०. नागिन लहराई,  डरे, मुग्ध हुए फिर मौन
     नागिन = सर्पिणी, चोटी

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