रूपमाला छंद:
(१४-१४, पंक्त्यांत गुरु-लघु)
कृष्ण नंदन ने न पायी, यशोदा सी मात
गोपिकाएँ ग्वाल गोधन, ले गये सँग तात
*
गा रहा जस प्रीत का जग, बना बैरी खाप
सिंह जैसे गरज प्रेमी, देख काँपा आप
*
(१४-१४, पंक्त्यांत गुरु-लघु)
कृष्ण नंदन ने न पायी, यशोदा सी मात
गोपिकाएँ ग्वाल गोधन, ले गये सँग तात
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गा रहा जस प्रीत का जग, बना बैरी खाप
सिंह जैसे गरज प्रेमी, देख काँपा आप
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1 टिप्पणी:
बहुत सुन्दर...
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