सोमवार, 20 जुलाई 2015

muktika

मुक्तिका:
संजीव
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मापनी: 2122 2122 2122 212
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कामना है रौशनी की भीख दें संसार को
मनुजता को जीत का उपहार दें, हर हार को

सर्प बाधा, जिलहरी है परीक्षा सामर्थ्य की
नर्मदा सा ढार दें शिवलिंग पर जलधार को

कौन चाहे मुश्किलों से हो कभी भी सामना
नाव को दे छोड़ जब हो जूझना मँझधार को

भरोसा किस पर करें जब साथ साया छोड़ दे
नाव से खतरा हुआ है हाय रे पतवार को

आ रहे हैं दिन कहीं अच्छे सुना क्या आपने?
सूर्य ही ठगता रहा जुमले कहा उद्गार को

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