शनिवार, 25 जुलाई 2015

मुक्तिका:

वरिष्ठ ग़ज़लकार प्राण शर्मा, लंदन के प्रति
भावांजलि
संजीव
*
फूँक देते हैं ग़ज़ल में प्राण अक्सर प्राण जी 
क्या कहें किस तरह रचते हैं ग़ज़ल सम्प्राण जी  

ज़िन्दगी के तजुर्बों को ढाल देते शब्द में 
सिर्फ लफ़्फ़ाज़ी कभी करते नहीं हैं प्राण जी 

सादगी से बात कहने में न सानी आपका 
गलत को कहते गलत ही बिना हिचके प्राण जी 

इस मशीनी ज़िंदगी में साँस ले उम्मीद भी 
आदमी इंसां बने यह सीख देते प्राण जी 

'सलिल'-धारा की तरह बहते रहे, ठहरे नहीं
मरुथलों में भी बगीचा उगा देते प्राण जी  
***

कोई टिप्पणी नहीं: