बुधवार, 3 अप्रैल 2019

त्रिपदियाँ



त्रिपदियाँ 
*
हर मंच अखाडा है 
लड़ने की कला गायब 
माहौल बिगाड़ा है. 
*
सपनों की होली में 
हैं रंग अनूठे ही 
सांसों की झोली में.
*
भावी जीवन के ख्वाब 
बिटिया ने देखे हैं 
महके हैं सुर्ख गुलाब 
*
चूनर ओढ़ी है लाल
सपने साकार हुए 
फिर गाल गुलाल हुए
*
मासूम हँसी प्यारी 
बिखरी यमुना तट पर
सँग राधा-बनवारी
*
पत्तों ने पतझड़ से 
बरबस सच बोल दिया 
अब जाने की बारी 
*
चुभने वाली यादें 
पूँजी हैं जीवन की 
ज्यों घर की बुनियादें 
*
देखे बिटिया सपने 
घर-आँगन छूट रहा
हैं कौन-कहाँअपने? 
* 
है कैसी अनहोनी?
सँग फूल लिये काँटे 
ज्यों गूंगे की बोली 
३.४.२०१६
***

कोई टिप्पणी नहीं: