रविवार, 21 अप्रैल 2019

अविश्वासं फलम् दायकम्

व्यंग्य

अविश्वासं फलम् दायकम्


विवेक रंजन  श्रीवास्तव

ए १ , विद्युत मण्डल कालोनी , शिला कुन्ज

जबलपुर

मो ७०००३७५७९८ , vivek1959@yahoo.co.in


  संस्कृत उक्ति है "विश्वासं फलम् दायकम्" . भगवत भक्ति के संदर्भ में और परमात्मा की कृपा प्राप्ति हेतु प्रायः साधु , संत  इसी उक्ति को दोहराकर उनके कहे पर भरोसा करने और विश्वास बनाये रखने को कहते हैं . "विश्वासं फलम् दायकम्"  ढ़ाढ़स बंधाने के काम आता है . भक्त बाबा जी के वचनो पर मगन झूमता रहता है .  सदियो से "विश्वासं फलम् दायकम्" का मंत्र फलीभूत भी होता रहा है . अपना सब कुछ , घरबार छोड़कर नवविवाहिता नितांत नये परिवार में इसी विश्वास की ताकत से ही चली आती है और सफलता पूर्वक नई गृहस्थी बसा कर उसकी स्वामिनी बन जाती है . भरोसे से ही सारा व्यापार चलता है . 

पर जब मैं नौकरी के संदर्भ में देखता हूं , योजनाओ की जानकारियो के ढ़ेर सारे फार्मेट देखता हूं और टारगेट्स की प्रोग्रेस रिपोर्ट का एनालिसिस करते अधिकारियो की मीटिंगो में हिस्सेदारी करता हूं तो मुझे लगता है कि इनका आधारभूत सिद्धांत ही  अविश्वासं फलम् दायकम् होता है . किसी को किसी के कहे पर कोई भरोसा ही नही होता , स्मार्टफोन के इस जमाने में हर कोई फोटो प्रूफ चाहता है .  "इफ और बट" वादो के दो बड़े दुश्मन होते हैं . अधिकारी लिखित सर्टिफिकेट से कम पर कोई भरोसा नहीं करता . अविश्वासं फलम् दायकम् के बल पर  वकीलो की चल निकलती है , एफीडेविट , और पंजीकरण के बिना न्यायालयो के काम ही नही चलते . अविश्वास के बूते ही रजिस्ट्रार का आफिस सरकार का कमाऊ पूत होता है .

भरी गर्मी में पसीना बहाते चुनावी रैलियां और भाषण करते नेताओ को देखकर विश्वास करना पड़ता है कि इन सब को वोटर पर और तो और खुद की की गई कथित जनसेवा पर तक तन्निक भी भरोसा नही है . वरना भला जिस नेता ने पांच सालो तक वोटर की हर तरह से खिदमत की हो उसे अपने लिये मुंए वोटर से महज एक वोट मांगने के लिये इस तरह साम दाम दण्ड भेद , मार पीट , लूट पाट , खून खराबा न करवाना पड़ता . बेवफा वोटर को लुभाने के लिये जारी सारे घोषणा पत्र , वचन पत्र और संकल्प पत्र यही प्रमाणित करते हैं कि राजनेता वोटर संबंध अविश्वासं फलम् दायकम् के मंत्र पर ही काम करते हैं . चुनाव जीतने से पहले नेता वोटर पर अविश्वास करता है और चुनाव जीत जाने के बाद खुद पर वोटर के अविश्वास को प्रमाणित करने में जुटा रहता है . अविश्वास का ही फल होता है कि शर्मा हुजूरी कुछ जन कल्याण के काम हो ही जाते हैं , क्योकि बजट खतम करने की एक लास्ट डेट होती है , अविश्वासं फलम् दायकम् के चलते ही काम के लिये पर्सु॓एशन किया जाता है , कुछ काम समय पर हो जाते हैं .आाकड़ो में सजा हुआ विकास दरअसल अविश्वासं फलम् दायकम् का ही सुफल होता है .   इसलिये कुछ भरोसे लायक पाना हो तो भरोसा ना करिये .  



विवेक रंजन  श्रीवास्तव

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