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शुक्रवार, 30 जून 2017

ayurved / swasthya

स्वास्थ्य लाभ के आयुर्वेदिक सूत्र
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गला और छाती की बीमारी का इलाज :
गले में इन्फेक्शन की श्रेष्ठ दवा है हल्दी । गले में दर्द, खराश, खांसी, कफ, तोसिल या अन्य पीड़ा हो तो आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस गले में डालकर थोड़ी देर चुप बैठ जाएँ। हल्दी गले में लार के साथ गले के अंदर जायेगी और एक खुराक में ही आराम मिलेगा।
दूसरी दवा है अदरक। अदरक का छोटा सा टुकड़ा मुह में रखकर और टॉफी की तरह चूसें तो खाँसी ठीक होगी। खाँसते-खाँसते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक के रस में थोड़ा पान का रस, गुड या शहद मिलाकर, थोडा गरम कर एक-एक चम्मच पीने से तुरंत आराम होगा ।
अनार का रस गरम कर पियें तो खाँसी तुरन्त ठीक होती है।
काली मिर्च चबाकर गरम पानी पियें या काली मिर्च चूसें तो खाँसी बंद होती है।
दमा, ब्रोंकिओल अस्थमा आदि की सबसे अच्छा दवा है गौमूत्र। गौ का सवेरे निकला आधा कप गोमूत्र पियें तो दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है ।
दालचीनी का पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या शहद मिलाकर गरम पानी के साथ लेने से दमा, अस्थमा ठीक होता है।
लगातार पाँच-छ: माह गोमूत्र पीने से टी.बी. ठीक होता है।
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