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शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

gyarah matrik chhand


ग्यारह मात्रिक छंद
१. पदादि यगण
यही चाहा हमने
नहीं टूटें सपने
शहीदी विरासतें
न भूलें खुद अपने
*
२. पदादि मगण
आओ! लें गले मिल
भाओ तो मिले दिल
सीचेंगे चमन मिल
फूलों सम खिलें दिल
*
३. पदादि तगण
सच्चा बतायें जो
झूठा मिटायें जो
चाहें मिलें नेता
वादे निभायें जो
*
४. पदादि रगण
आपकी चाहों में
आपकी बाँहों में
जिंदगी है पूजा
आपकी राहों में
*
५. पदादि जगण
कहीं नहीं हैवान
कहीं नहीं भगवान
दिखा ह्रदय में झाँक
वहीँ बसा इंसान
*
६. पदादि भगण
आपस में बात हो
रोज मुलाकात हो
संसद में दूरियाँ
व्यर्थ न बेबात हों
*
७. पदादि नगण
सब अधरों पर हास
अब न हँसेंगे ख़ास
हर जन होगा आम
विनत रचें इतिहास

*
८. पदादि सगण
करना मत बहाना
तजना मत ठिकाना
जब तक वयस्क न हो
बिटिया मत बिहाना
*
९. पदांत यगण
हरदम हम बुलाएँ
या आप खुद आयें
कोई न फर्क मानें
१०. पदांत मगण
आस जय बोलेगी
रास रस घोलेगी
प्यास बुझ जाएगी
श्वास चुप हो लेगी
.
मीत! आ जाओ ना
प्रीत! भा जाओ ना
चैन मिल जायेगा
गीत गा जाओ ना
*
११. पदांत तगण
रंगपंचमी पर्व
धूम मचाते सर्व
दीन न कोई जान
भूल, भुला दें गर्व
.
हो मस्ती में लीन
नाच बज रही बीन
वेणी-नागिन झूम
नयन हो रहे मीन
.
बाँके भुज तलवार
करते नहीं प्रहार
सविनय माँगें दान
सुमुखी-भुजा का हार
.
मिले हार हो जीत
मिले प्रीत को प्रीत
द्वैत बने अद्वैत
बजे श्वास संगीत
*
१२. पदांत रगण
गीत प्रीत के सुना
गीत मीत के सुना
      हार में न हार हो
      जीत में न जीत हो
      शुभ अतीत के सुना
      गीत रीत के सुना
यार हो, जुहार हो
प्यार हो, विहार हो
नव प्रतीति के सुना
गीत नीति के सुना
      हाथ नहीं जोड़ना
      साथ नहीं छोड़ना
      बातचीत के सुना
      गीत जीत के सुना
*
१३. पदांत जगण
जनगण की सरकार
जन संसद दरबार
रीती-नीति-सहयोग
जनसेवा दरकार
देशभक्ति कर आप
रखें स्वच्छ घर-द्वार
पर्यावरण न भूल
पौधारोपण प्यार
धुआँ-शोर अभिशाप
बहे विमल जल-धार
इस पल में इनकार
उस पल में इकरार
नकली है तकरार
कर असली इज़हार
*
१४. पदांत भगण
जिंदगी जलसा घर
बन्दगी जल सा घर
प्रार्थना कर, ना कर
साधना कर ही कर
अर्चना नित प्रति कर
वन्दना हो सस्वर
भावना यदि पवन
कामना से मत डर
कल्पना नवल अगर
मान ले अजरामर
*
१५. पदांत नगण
नटनागर हों सदय
कर दें पल में अभय
शंका हर जग-जनक
कर दें मन को अजय
.
पान कर सकें गरल
हो स्वभाव निज सरल
दान कर सकें अमिय
जग-जीवन हो विमल
.
नेह नर्मदा अमर
जय कट जीवन समर
करे द्वेष अहरण
भरे प्रीत चिर अमर
*
१६. पदांत सगण
पत्थर को फोड़ लें
ईंटों को जोड़ लें
छोड़ें मत राह को
कदमों को मोड़ लें
नाहक क्यों होड़ लें?
मंजिल क्यों छोड़ दें?
डरकर संघर्ष से
मन को क्यों तोड़ लें?
       .
सत्य जो हो कहिए
झूठ को मत तहिए
घाट पर रुकिए मत
नर्मदा बन बहिए
रीत नित नव गढ़िए
नीत-पथ पर बढ़िए
सीढ़ियाँ मिल चढ़िए
प्रणय-पोथी पढ़िए
*
१७. पदादि-पदांत यगण
उसे गीत सुनाना
उसे मीत बनाना
तुझे चाह रहा जो
उसे प्रीत जताना
.
सुनें गीत सुनाएँ
नयी नीत बनायें
नहीं दर्द जरा हो
लुटा दें सुख पायें
*
१८. पदादि यगण, पदांत मगण
हमें ही है आना
हमें ही है छाना
बताता है नेता
सताता है नेता
*
१९. पदादि मगण पदांत यगण
चाहेंगे तुम्हें ही
वादा है हमारा
भाए हैं तुम्हें भी
स्वप्नों में पुकारा
*
२०. पदादि मगण पदांत तगण
सारे-नारे याद
नेता-प्यादे याद
वोटों का है खेल
वोटर-वादे याद

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