शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

muktika

छंद बहर का मूल है 
एक मुक्तिका 
[चौदह मात्रिक मानव जातीय, मनोरम छंद, पदादि गुरु, पदांत यगण  
मापनी २१२२ २१२२, बहर फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन] 
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ज़िन्दगी ने जो दिया है 
बन्दगी से ही लिया है 
सूर्य-ऊषा हैं सिपाही 
युद्ध किरणों ने किया है 
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आदमी बेटा पिलाता 
स्वेद भू माँ ने पिया है 
मौत से जो प्रेम पाले 
वो मरा तो भी जिया है 
वक़्त कैसा क्या बताएँ?
होंठ ने खुद को सिया है 
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facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil' 

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