शनिवार, 10 सितंबर 2016

navgeet

एक रचना -
कौन?
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कौन रचेगा राम-कहानी?
कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??
खुशियों की खेती अनसिंचित, 
सिंचित खरपतवार व्यथाएँ। 
*
खेत 
कारखाने-कॉलोनी 
बनकर, बिना मौत मरते हैं।
असुर हुए इंसान,
 न दाना-पानी खा,
दौलत चरते हैं। 
वन भेजी जाती सीताएँ, 
मन्दिर पुजतीं शूर्पणखाएँ। 
कौन रचेगा राम-कहानी?
कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??
*
गौरैयों की देखभाल कर 
मिली बाज को जिम्मेदारी। 
अय्यारी का पाठ रटाती,
पैठ मदरसों में बटमारी। 
एसिड की शिकार राधाएँ 
कंस जाँच आयोग बिठाएँ। 
कौन रचेगा राम-कहानी?
कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??
*
रिद्धि-सिद्धि, हरि करें न शिक़वा,
लछमी पूजती है गणेश सँग। 
'ऑनर किलिंग' कर रहे  दद्दू 
मूँछ ऐंठकर, जमा रहे रंग। 
ठगते मोह-मान-मायाएँ 
घर-घर कुरुक्षेत्र-गाथाएँ। 
कौन रचेगा राम-कहानी?
कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??
*
हर कर्तव्य तुझे करना है, 
हर अधिकार मुझे वरना है।
माँग भरो, हर माँग पूर्ण कर 
वरना रपट मुझे करना है। 
देह मात्र होतीं वनिताएँ 
घर को होटल मात्र बनाएँ। 
कौन रचेगा राम-कहानी?
कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??
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दोष न देखें दल के अंदर, 
और न गुण दिखते दल-बाहर। 
तोड़ रहे कानून बना, सांसद,   
संसद मंडी-जलसा घर।  
बस में हो तो साँसों पर भी 
सरकारें अब टैक्स लगाएँ। 
कौन रचेगा राम-कहानी?
कौन कहेगा कृष्ण-कथाएँ??
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९-८-२०१६ 
गोरखपुर दंत चिकित्सालय 
जबलपुर 
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