मंगलवार, 6 सितंबर 2016

व्यंग्य कविता

व्यंग्य रचना-
बाबू  और यमराज
सुरेश उपाध्याय













दफ्तर का एक बाबू मरा
सीधा नरक में जाकर गिरा
न तो उसे कोई दुःख हुआ
ना वो घबराया
यों ही ख़ुशी में झूम कर चिल्लाया
वाह, वाह क्या व्यवस्था है?
क्या सुविधा है?
क्या शान है?
नरक के निर्माता! तू कितना महान है?
आँखों में क्रोध लिए यमराज प्रगट हुए, बोले-
'नादान!  यह दुःख और पीड़ा का दलदल भी
तुझे शानदार नज़र आ रहा है?
बाबु ने कहा -
'माफ़ करें यमराज
आप शायद नहीं जानते
की बन्दा सीधे हिंदुस्तान से आ रहा है।
***

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