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मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

sanskrit quote:

संस्कृत सुभाषित :


"एतेषु तरुणमारुत दूयमान 
 दावानलैः कवलितेषु महीरुहेषु।
 अम्भो न चेज्जलद नमुंचसि मा विमुंच
 वज्रं पुनः क्षिपसि निर्दय कस्य हेतो: ॥"

दावानल में जलाती वृक्ष, वायु भरपूर।
दे-मत दे जल, गिरा मत, बिजली बादल क्रूर!    

तेज़ हवा चलने से दावानल में वृक्ष जलते जा रहे हैं। उन पर पानी नहीं बरसाना हो तो न बरसा। किन्तु हे निर्दय बादल, तू उन पर बिजली किस हेतु गिरा रहा है?

1 टिप्पणी:

sitaran chandavarkar ने कहा…


आदरणीय आचार्य जी,
अति सुंदर!
सस्नेह
सीताराम चंदावरकर