स्तम्भ menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

बुधवार, 3 अप्रैल 2013

gazal: anand pathak

ग़ज़ल :  
क्या करेंगे....
आनन्द पाठक,जयपुर

 
क्या करेंगे आप से हम याचनाएं
मर चुकी जिनकी सभी संवेदनाएं
 
जो मिले अनुदान रिश्वत में बँटे है फ़ाइलों में चल रही परियोजनाएं
 
रोशनी के नाम दरवाजे खुले हैं हादसों की बढ़ गई संभावनाएं
 
पत्थरों के शहर में कुछ आइनें हैं डर सताता है कहीं वो बिक न जाएं
 
आप की हर आहटें पहचानते हैं जब कभी जितना दबे भी पाँव आएं
 
चाहता है जब कहे वो बात कोई बेझिझक हम हाँमें उसकी हाँमिलाएं
 
वो इशारों से नहीं समझेगा आननजब तलक आवाज न अपनी बढ़ाएं
-
 

कोई टिप्पणी नहीं: