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बुधवार, 10 अप्रैल 2013

bal geet kumar gaurav ajitendu

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मत्तगयन्द सवैया

कौन यहाँ सबसे बलवाला



बात चली जब जंगल में - पशु कौन यहाँ सबसे बलवाला।
सूँड़ उठा गजराज कहे - सब मूरख मैं दम से मतवाला।
तो वनराज दहाड़ पड़े - बकवास नहीं बस मैं रखवाला।
बंदर पेड़ चढ़ा हँसते - मुझसे टकरा कर दूँ मुँह काला॥
लोमड़, गीदड़ और सियार सभी झपटे - रुक जा सुन थोड़ा।
नाम गधा अपना यदि आज तुझे हमने जम के नहिं तोड़ा।
देख हुआ अपमान गधा पिनका निकला झट से धर कोड़ा।
भाल, जिराफ कुते उलझे दुलती जड़ भाग गया हिनु घोड़ा॥
गैंडु प्रसाद चिढ़े फुँफु साँप बढ़ा डसने विषदंत दिखाते।
मोल, हिपो उछले हिरणों पर भैंस खड़ी खुर-सींग नचाते।
ऊँट बिलाव कहाँ चुप थे टकराकर बाघ गिरे बलखाते।
बैल कँगारु भिड़े चुटकी चुहिया बिल में छुप ली घबराते॥
पालक, गाजर ले तब ही छुटकू खरहा घर वापस आया।
पा लड़ते सबको, छुटकू अपने मन में बहुते घबराया।
बात सही बतला सबने उसको अपना सरपंच बनाया।
एक रहो इसमें बल है कह के उसने झगड़ा सुलझाया॥

1 टिप्पणी:

Kumar Gaurav Ajeetendu ने कहा…

meri rachna ko shamil karne ke liye aapka hriday se aabhari hun.........bahut-bahut dhanyavad