रविवार, 7 जुलाई 2019

भवन माहात्म्य दोहावली

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भवन माहात्म्य दोहावली 

अभियंता संजीव वर्मा 'सलिल'                                                                                  




डी.सी.ई., बी.ई., एम.आई.ई., एम.ए.(अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र), एलएल. बी., डी.सी.ए., विशारद



*
भवन मनुज की सभ्यता, ईश्वर का वरदान।
रहना चाहें भवन में, भू पर आ भगवान।१।
*
भवन बिना हो जिंदगी, आवारा-असहाय।
अपने सपने ज्यों 'सलिल', हों अनाथ-निरुपाय।२।
*
मन से मन जोड़े भवन, दो हों मिलकर एक।
सब सपने साकार हों, खुशियाँ मिलें अनेक।३।
*
भवन बचाते जिंदगी, सड़क जोड़ती देश।
पुल बिछुड़ों  को मिलाते, तरु दें वायु हमेश।४।
*
राष्ट्रीय संपत्ति पुल, सड़क इमारत वृक्ष।
बना करें रक्षा सदा, अभियंतागण दक्ष।५।
*
भवन सड़क पुल रच बना, आदम जब इंसान।
करें देव-दानव तभी, मानव का गुणगान।६।
*
कंकर को शंकर करें, अभियंता दिन-रात।
तभी तिमिर का अंत हो, ऊगे नवल प्रभात



७।
*
भवन सड़क पुल से बने, देश सुखी संपन्न।
भवन सेतु पथ के बिना, होता देश विपन्न।८।
*
इमारतों की सुदृढ़ता, फूँके उनमें जान।
देश सुखी-संपन्न हो, बढ़े विश्व में शान।९।
*
भारत का नव तीर्थ है, हर सुदृढ़ निर्माण।
स्वेद परिश्रम फूँकता, निर्माणों में प्राण।१०।
*
अभियंता तकनीक से, करते नव निर्माण।
होता है जीवंत तब, बिना प्राण पाषाण।११।
*
भवन सड़क पुल ही रखें, राष्ट्र-प्रगति की नींव।
सेतु बना- तब पा सके, सीता करुणासींव।१२।
*
करे इमारत को सुदृढ़, शिल्प-ज्ञान-तकनीक।
लगन-परिश्रम से बने, बीहड़ में भी लीक।१३।
*
करें कल्पना शून्य में, पहले फिर साकार।
आँकें रूप अरूप में, यंत्री दे आकार।१४।
*
सिर्फ लक्ष्य पर ही रखें, हर पल अपनी दृष्टि।
अभियंता-मजदूर मिल, रचें नयी नित सृष्टि।१५।
*
सड़क देश की धड़कनें, भवन ह्रदय पुल पैर।
वृक्ष श्वास-प्रश्वास दें, कर जीवन निर्वैर।१६।
*
भवन सेतु पथ से मिले, जीवन में सुख-चैन।
इनकी रक्षा कीजिए, सब मिलकर दिन-रैन।१७।
*
काँच न तोड़ें भवन के, मत खुरचें दीवार।
याद रखें हैं भवन ही, जीवन के आगार।१८।
*
भवन न गंदा हो 'सलिल', सब मिल रखें खयाल।
कचरा तुरत हटाइए, गर दे कोई डाल।१९।
*
भवनों के चहुँ और हों, ऊँची वृक्ष-कतार।
शुद्ध वायु आरोग्य दे, पाएँ ख़ुशी अपार



।२०।

*
कंकर से शंकर गढ़े, शिल्प ज्ञान तकनीक।
भवन गगनचुंबी बनें, गढ़ सुखप्रद नव लीक।२१।
*
वहीं गढ़ें अट्टालिका जहाँ भूमि मजबूत।
जन-जीवन हो सुरक्षित, खुशियाँ मिलें अकूत।२२।
*
ऊँचे भवनों में रखें, ऊँचा 'सलिल' चरित्र।
रहें प्रकृति के मित्र बन, जीवन रहे पवित्र।२३।
*
रूपांकन हो भवन का, प्रकृति के अनुसार।
अनुकूलन हो ताप का, मौसम के अनुसार।२४।
*
वायु-प्रवाह बना रहे, ऊर्जा पायें प्राण।
भवन-वास्तु शुभ कर सके, मानव को संप्राण।२५।
***

तकनीकी आलेख 

 ​
 सभी के लिए आवास
 ​ 
  2022
 ​

अनिल जी खंडेलवाल,
बी.ई. (सिविल), एम.आई.ई, एफ.आई.वी.

सार:
यह पत्र 2022 तक 
 ​'
 सभी के लिए आवास
 ​'
  के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न भारत सरकार की योजनाओं को 
 ​
 ​
 वर्तमान प्रशासनिक ढांचे में, ​
 ​
बहुत कम संशोधन के साथ, 
 पुनर्निर्मित करने और
 ​ ​
 
एकीकृत करने के लिए एक समर्पित और सरलीकृत दृष्टि विकसित करने की एक विनम्र कोशिश है
परिचय :
सभ्यता के इतिहास का मानवशास्त्र बहुत ही अच्छी तरह से प्रकट करता है।  हम इस तथ्य से सहमत 
 ​हैं
  कि प्रौद्यौगिकीय नवाचारों
 ​ ​
 
(व्हील से मोबाइल एप्लिकेशन) में कलाओं, रंगों, पंथ, संस्कृति, लिंग, धर्म और राष्ट्रीयता के बावजूद अरबों लोगों के जीवन में सुधार
 ​ ​
 
हुआ है जबकि सामाजिक, राजनैतिक क्रांतियाँ या उत्क्रांतियाँ लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन करती हैं और अंत में आध्यात्मिक
 ​ ​
 
जागरूकता कुछ 
 ​की
  ब्रह्मांडीय चेतना को बदलती है
 ​
 
 
खा
 ​द्य
  पदार्थ, वस्त्र और आश्रय जीवित रहने के लिए मूलभूत जरूरत हैं। स्वतंत्रता के पिछले ७० वर्षों में राष्ट्र पहले दो के लिए लगभग आत्मनिर्भर हो गया है, लेकिन लाखों नागरिकों के लिए विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में तीसरे के बारे में बहुत कुछ करना आवश्यक है अब सूचना प्रौद्योगिकी की गतीय प्रगति के साथ एक सरकार के एकल कार्यकाल के भीतर एक छतरी के तहत सिविल इंजीनियरिंग में कई लक्ष्य हो सकते हैं। भारत सरकार की योजनाओं में कई तकनीकी नवाचार लाए गए हैं जैसे मिशन के लिए समर्पित पोर्टल। इस पोर्टल में सभी नागरिकों अपने मोबाइल पर अपनी स्वयं की भाषा में पहुँच सकते हैं। 2011 की जनगणना के आवास डेटा के आधार पर आवास की मांग चित्र 1 में प्रस्तुत की गई है।
पृष्ठभूमि:
स्वतंत्रता के बाद भारत ने तीन उल्लेखनीय तकनीकी क्रांतियों का लाभ उठाया है, जिससे लगभग हर भारतीय को लाभ हुआ है: 
1.  1960 के दशक में हरित क्रांति पद्मविभूषण डॉ एमएस स्वामिनाथन (1925-), 1970 के दशक में सफेद क्रांति, पद्मविभूषण वर्गीज कुरियन, एम. टेक. (मेट.) (1921-2012) और 1980 के दशक में कॉम क्रान्ति पद्मभूषण सैम पित्रोदा, एम.टेक. (ए.आई.) (1 942-) के नेतृत्व में थी और अब यह लगता है कि 'हाउसिंग फॉर आल: 2022-39; विकसित करना संभव है।
इसके अलावा निम्नलिखित महान लोगों के समर्पित कार्यों को हमें ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में प्राथमिकता पर नवीनतम निर्माण प्रौद्योगिकीय विकास को शामिल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए, लेकिन अपने कस्टम, परंपरा और जीवित व्यवस्था को संरक्षित करना तथा आसपास के निकट रोजगार अवसर बनाना: 1930-40: 'ग्राम स्वराज'; राष्ट्र के पिता, पूर्व स्वतंत्रता दिवसों के दौरान महात्मा गांधी द्वारा रखे गए। 1950 के दशक में: 'भूदान आंदोलन'; अपने महानतम शिष्य भारत रत्न विनोबा भावे के नेतृत्व में, जिस देश में देश भर में दान 50 लाख एकड़ के ऊपर था, जो अकेले बेघर आबादी के लिए पर्याप्त था! 2000: भारतरत्न ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने प्रावधान में व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत किया और संसद में कई राज्य विधानसभाएं (बाद में आई.आई.एम., मैंने उनके मार्गदर्शन के तहत बड़े पैमाने पर काम किया) के तहत प्रस्तुत 'पुरा';। 2014: लाल किले के अपने पहले स्वतंत्रता दिवस के भाषण में वर्तमान प्रधान मंत्री द्वारा घोषित 'संसद आदर्श ग्राम योजना'; ने गाँवों पर जोर दिया, न केवल इसलिए कि अधिकांश आबादी वहाँ रह गई थी, लेकिन दूरदर्शिता के कारण भी भारतीय जनसंख्या और सामर्थ्य के संदर्भ में , गांव में एक बेहतर आजीविका न केवल गांवों को बनाए रखने में मदद करेगी बल्कि शहरों में प्रवास भी कर सकती हैं और इस तरह से बढ़ती शहरीकरण के दबाव के कारण शहरों को पंगु बनाते हैं, जिससे सड़कें यातायात से खड़ी हो जाती हैं, अस्वच्छ गड़गड़ाहट बढ़ रही हैं आदि। ग्रामीण बनाम जनगणना आधारित भिन्नता स्वतंत्रता के बाद से शहरी आबादी आंकड़ा 2 में प्रस्तुत की गई है

सभी के लिए आवास: 'मिशन के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं को पुनर्निर्माण और एकीकृत करना
 सामान्य :
1. यह मिशन सरकार द्वारा सक्रिय रूप से सक्रियता, उत्साह और लोगों की जागरूकता के लिए मीडिया अभियान के साथ-साथ 2018 के 2014 के जीएसटी और जीएसटी के स्वच्छ भारत मिशन के लिए सरकार द्वारा किए जाने की उम्मीद है।
2. आधार के रूप में पैन, बैंक खाता और मोबाइल नंबर के आधार पर जल्द ही पूरा होने की संभावना है, सरकार बेघर नागरिकों की पहचान करने के लिए एक तंत्र विकसित कर सकती है और स्वयं के घर के लिए उनकी जुटती को आगे बढ़ा सकती है।
3. मिशन के सहज गति से निष्पादन के लिए जीएसटी परिषद की तरह एक "आवास परिषद" को सभी के साथ समन्वयित करने के लिए तैयार किया जा सकता है: मैं । सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ अन्य योजनाएं, उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री अवास योजना (पीएमए), संसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई), स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) आदि।
ii। राज्य सरकारें
iii। सार्वजनिक और निजी संस्थानों और संगठनों

(बी) तकनीकी पहलू:
4. कई शोध, डिजाइन और निष्पादन कार्य पहले से ही विभिन्न सरकारी / अर्ध सरकारी / सार्वजनिक / निजी संस्थानों और संगठन द्वारा किया गया है पिछले कुछ दशकों में आर्थिक और किफायती ग्रामीण और जन आवास के क्षेत्र में और हाल ही में बुद्धिमान क्षेत्र में किया जाता है और ऊर्जा कुशल इमारतों, जो सभी आसानी से प्रत्येक लाभार्थी को ज्ञान चैनल के रूप में एक पोर्टल के एक छाता के तहत लाया जा सकता है, जिसे वे स्थानीय स्थितियों और सामर्थ्य के अनुसार चयन और चुन सकते हैं।
5. आवश्यक मानव संसाधन के लिए, विद्यमान पेशेवरों जैसे अभियंता, आर्किटेक्ट्स (लेखाकार, अधिवक्ताओं) आदि को उनके माता- पिता वैधानिक निकायों की संबद्धता के साथ पीएमकेवीवाई के तहत शुरू किए गए अल्पावधि ऑनलाइन और ऑफलाइन 'क्षमता निर्माण कार्यक्रम' के माध्यम से अधिकार किया जाना चाहिए।
6. स्वतंत्रता के बाद चंडीगढ़ जैसे पूरी तरह से नए शहरों की शायद ही कभी योजना बनाई गई है लेकिन गैर-कृषि क्षेत्रों पर पूरी तरह से नए शहरों या शहर की योजना बनाना बहुत अधिक मददगार होगा, जनसंख्या घनत्व संतुलन और बेहतर कनेक्टिविटी। 
(सी) आर्थिक पहलू:
7. पीएमएवाई जैसे ब्याज राशि के लिए सीएलएसएस (क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम) के तहत, अनुवर्ती कारणों से लाभ को सीधे लाभार्थियों के खाते में जमा किया जाना चाहिए:
मैं। राज्य सरकारों द्वारा संपत्ति के पंजीकरण के लिए नाममात्र टोकन स्टाम्प शुल्क शुल्क
ii। स्थानीय सरकारों द्वारा मानक योजना के स्वत: अनुमोदन के लिए नाममात्र टोकन शुल्क
iii। केन्द्रीय सरकार द्वारा सामग्री, श्रम और सेवाओं का लाभ उठाने पर जीएसटी का इनपुट क्रेडिट।
8. एमजीएनआरईजी जैसी अन्य सरकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों के लिए रोजगार के अवसरों को ईएमआई के सुरक्षित पुनर्भुगतान से जोड़ा जा सकता है।
9. आवास ऋणों को अनिवार्य रूप से और सामूहिक रूप से सीएनए, मध्य केंद्रीय नोडल एजेंसी के जरिये बीमा के साथ
लाभार्थियों द्वारा वैकल्पिक रूप से और व्यक्तिगत रूप से बीमा करने की आवश्यकता है।
पीएलआई अर्थात् प्राइम लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस
(डी) वैधानिक प्रावधान:
मिशन की सफलता के लिए दो महत्वपूर्ण वैधानिक प्रावधान वांछनीय हैं, हालांकि कठिन लगता है
10. योजना के तहत बनाए गए घरों के लिए बिक्री या किराए पर समय सीमा तय की जानी चाहिए।
11. आवासीय उद्देश्य के लिए किसी व्यक्ति के स्वामित्व वाले घर की संख्या और क्षेत्र की एक ऊपरी सीमा भी तय की जानी चाहिए।
इन सभी को योजनाबद्ध रूप से चित्र 3 में प्रस्तुत किया गया है। 

निष्कर्ष:
यह मिशन न केवल प्रत्येक नागरिक को अपने आवास के गर्व के साथ सशक्त बनाएगा बल्कि अल्पकालिक और दीर्घ अवधि में भी जीडीपी विकास में योगदान देगा और गांवों के नवीनीकरण के कारण उन्हें अधिक योगदान करने के लिए सक्षम करेगा।

संदर्भ:
1. विभिन्न योजनाओं के लिए भारत सरकार की वेबसाइटों और पोर्टल्स
2. एमओएस एंड टी द्वारा अनुसंधान संगठन की निर्देशिका
3. ग्राम स्वाज
4. भूदन आंदोलन
5. पुरा
6. ग्रामीण बैंक, ढाका द्वारा सूक्ष्म वित्तपोषण के मामले में केस अध्ययन
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लेखक परिचय: अनिल जी खंडेलवाल, 1986 में जबलपुर सरकार एंज कॉलेज से स्नातक, iei के सक्रिय सदस्य हैं., और 1991 से इंदौर के स्वतंत्र स्ट्रक्चरल इंजीनियर के रूप में स्नातक हैं।  संपर्क  anil.khandelwal64@gmail.com।
कागनेटिव रेडियो
प्रो. शोभित वर्मा 
*
आज के इस आधुनिक युग में दूरसंचार के उपकरणों का उपयोग बढ़ता ही जा रहा है। इन
उपकरणों के द्वारा सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिये वायरलैस माध्यमों
द्वारा उपयोग किया जाता है । कई विकसित तकनींके जैसे कि वाय-फाय ;, बलूटूथ ; आदि इस
क्षेत्र मे उपयोग में लायी जा रही हैं ।
परंतु इन सभी वायरलैस तकनीकों को साथ में उपयोग में लाने के कारण स्पेकट्रम की
अनउपलब्धता एक बड़ी समस्या का रूप लेती जा रही है । असल में स्पेकट्रम को लाइसेस्ंड
उपयोगकर्तो ही उपयोग करता है । यह सुनिष्चित किया जाता है कि स्पेकट्रम का उपयोग केवल
लाईसेस्ंड उपयोगकर्ता ही कर सके । इस कारण स्पेकट्रम का एक बहुत बड़ा हिस्सा
अनउपयोगी ही रह जाता हे । स्पेकट्रम का आवंटन सरकार की नितियों के अनुसार किया जाता
है ।
     इस समस्या के निराकरण हेतु 1999 में जे. मितोला ने कागनेटिव रेडियो का सिंद्धात प्रस्तुत
किया  । कागनेटिव रेडियो सिंद्धात के अनुसार जब भी लाईसेस्ंड उपयोगकर्तो स्पेकट्रम का
उपयोग न कर रहा ही ऐसे समय में अनलाईसेस्डं उपयोक्र्ता उस स्पेकट्रम का उपयोग कर
सकता है और जैसे ही लाईसेस्ंड उपयोगकर्ता की वापसी होगी , अनलाईसेस्डं उपयोगकर्ता
किसी दूसरे खाली स्पेकट्रम की सहायता से अपना कार्य करने लगेगा । यह प्रक्रिया इस तरह
चलती रहेगी जब तक सूचना का आदान-प्रदान नहीं हो जाता । 

            
कागनेटिव रेडियो के बहुत से आयाम हैं जैसे कि स्टेकट्रम सेंसिग ; स्पेकट्रम शेयरेरिंग स्पेकट्रम
मोबीलिटी आदि हर आयाम अपने आप में शोध का विषय है ।

जबलपुर के लम्हेटा घाट पर ‘लक्ष्मण झूला’ का प्राथमिक

प्रस्ताव एवम् अध्ययन

इंजी. सुरेन्द्र सिंह पंवार
9300104296/7000388332
pawarss2506@gmail.com

अध्ययन सार-- नर्मदा नदी पर जबलपुर स्थित लम्हेटा घाट अध्यात्म,
पुरातात्विक महत्त्व तथा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. नर्मदा इस घाट पर
अपने पूरे वैभव के साथ है. प्रत्येक पूर्णिमा को होने वाली नर्मदा पंचकोसी
परिक्रमा इस घाट पर नौकाओं से पार कर पूर्ण होती है. इस कठिनाई को देखते
हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने लम्हेटा घाट पर
लक्ष्मण झूला पुल बनाने की घोषणा की. नर्मदा पंचकोसी परिक्रमावासियों की
तरफ से प्रारंभिक सर्वेक्षण और आधारभूत आंकड़ों के आधार पर परमहंस आश्रम
से उस पार (न्यूनतम पाट-- 450मीटर) लक्ष्मण-झूला की तर्ज पर झूला पुल का
यह युक्तियुक्त प्रस्ताव, कलेक्टर, जबलपुर के माध्यम से शासन को भेजा गया
है, जिसकी अनुमानित लागत रूपये 22.50 करोड़ आंकी गयी है. इस पुल के बन
जाने से न केवल लम्हेटा घाट का पर्यटन महत्त्व बढ़ेगा वरन नर्मदा के दक्षिणी
तट के लोगों को पैदल पार करने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्राप्त होगा.
विषय प्रवेश -
मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी माँ नर्मदा एकमात्र ऐसी संपूजित नदी है, जिसकी परिक्रमा होती
है. नर्मदा परकम्मा-वासी सम्पूर्ण श्रध्दाभाव से, मन-बचन- कर्म से इसकी परिक्रमा करते हैं.
नर्मदा का शीतल-निर्मल जल और स्निग्ध-सौन्दर्य नर्मदा भक्तों को सदैव आकर्षित करता है.
इसके तटवर्ती मठ, मंदिर और तीर्थ, उनमें स्थापित आस्था-केंद्र और उनसे उत्सर्जित
आध्यात्मिक-ऊर्जा से नर्मदा का महत्त्व स्वत: ही बढ़ जाता है. नर्मदा की प्राकृतिक व भूगर्भीय
धरोहरों के साथ-साथ उस पर निर्मित बृहद और मध्यम बाँध, उनसे निर्मित कृत्रिम जलाशय--
पर्यटन के नित-नये आयाम स्थापित कर रहे हैं.

नर्मदा के उत्तरी तट पर अवस्थित जबलपुर महानगर के अंतर्गत ग्वारीघाट,
तिलवाराघाट, लम्हेटाघाट और भेडाघाट प्रमुख हैं, जहाँ नर्मदा का वैभव दर्शनीय है. पर्यटन की
दृष्टि से महत्वपूर्ण ये चार घाट जबलपुर की शान हैं, पहचान हैं, क्रमशः धर्म, अर्थ, मोक्ष और
काम के पर्याय है.
लम्हेटा घाट का महत्त्व -- -- - आध्यात्मिक महत्त्व का यह घाट तंत्र-साधना
के साथ-साथ पितरों के श्राध्द के लिए सर्वोपरी स्थान है. स्कन्द-पुराण के रेवाखंड में चर्चा है
कि लम्हेटा घाट के गया कुण्ड से श्राध्द का चलन चला है.यहाँ खुद इन्द्र ने आकर पिंडदान
किया था. यहाँ स्थित प्राचीन श्री यंत्र मंदिर, श्री राधाकृष्ण मंदिर, गया-तीर्थ, कुम्भेश्वर-तीर्थ,
त्रिशूल भेद, श्री परमहंस आश्रम, इस्कान टेम्पल, घुघरा फाल इत्यादि पवित्र स्थल हैं.
पुरातात्विक महत्त्व के इस स्थलपर डायनासोर के फासिल्स प्राप्त हुए थे, यहाँ के फासिल्स,
लम्हेटा-फासिल्स नाम से सुविख्यात हैं.
लम्हेटा घाट की स्थिति-- -- - [Latitude-23.1118* N/ Longitude-79.8356*E]
जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित लम्हेटा घाट, राष्ट्रीय-राजमार्ग -7 से 4
किलोमीटर दूर स्थित है. नर्मदा नदी में तिलवारा एक्वाडक्ट-सह- राष्ट्रीय राजमार्ग सेतु से इसकी
जलमार्ग दूरी 4 किलोमीटर है, जबकि भेडाघाट की मार्बल्स-रॉक, लम्हेटा घाट से मात्र 3
किलोमीटर पर है. मेडिकल कालेज-बाजनामठ से आगे सगडा से भेडाघाट का पर्यटन हेतु नया
रास्ता विकसित किया गया है वह लम्हेटा घाट से होकर ही जाता है. भेडाघाट और गढ़ा इसके
नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं.
लम्हेटा घाट और पंचकोशी यात्रा -- -- - भेडाघाट में हरे-कृष्णा मंदिर
की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही उस परिक्षेत्र में नर्मदा पंचकोशी यात्रा का प्रचलन हुआ, जो प्रति
माह पूर्णिमा को होती है. इस यात्रा में नर्मदा-भक्तों की बढती श्रध्दा ने जन-सामान्य के साथ
शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया. पंचकोशी यात्रा मार्ग में सरस्वती घाट और लम्हेटा
घाट पर नर्मदा-भक्तों को नियंत्रित कर नौकाओं से नर्मदा पार कराने का कार्य स्थानीय
प्रशासन के जिम्मे रहता है. विगत कार्तिक-पूर्णिमा को उमड़े जन-सैलाब से लम्हेटा घाट पर
उपलब्ध मूलभूत व्यवस्थायें चरमराती दिखाई दी और अधिकांश भक्त अपनी यात्रा पूरी करने
में असमर्थ रहे. पंचकोशी-परिक्रमा यात्रियों की भावनाओं को संज्ञान में लेते हुए सरस्वती घाट
पर एक पुल और लम्हेटा घाट पर लक्ष्मण-झूला की तर्ज पर झूला-पुल के निर्माण का प्रस्ताव
माननीय मुख्य-मंत्री के समक्ष रखा गया, जिसे सिध्दांतत: स्वीकार किया गया. पंचकोशी-
परिक्रमावासियों के अनुरोध पर लम्हेटाघाट में नर्मदा झूला (लक्ष्मण झूला के अनुरूप) का
प्रथमदृष्टया प्रस्ताव तैयार किया गया है.
प्रारम्भिक सर्वेक्षण -- -पंचकोशी यात्रियों के दल और क्षेत्रीय निवासियों की
उपस्थिति में झूला पुल के लिए आरंभिक सर्वे किया गया. प्रारंभिक तौर पर निम्न दस्तावेज
एकत्रित किये -

-- लम्हेटा घाट का गूगल मेप -
-सर्वे ऑफ़ इंडिया की टोपो शीट-55 M/16
लोगों से आपसी चर्चा और टोपोशीट के आधार पर परिक्षण उपरांत तकनीकी दृष्टि से उचित
तीन स्थितियां इस प्रकार हैं -
स्थिति अ-श्री राधाकृषण मंदिर(लम्हेटा) से लेकर परम्परागत पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर (नौका
मार्ग पर लम्हेती ग्राम स्थित शनि मंदिर तक) यहाँ पुल की लम्बाई लगभग 750 मीटर आती
है.
स्थिति ब-नर्मदा घाट (श्री परमहंस आश्रम )के नीचे पहाड़ी से आरम्भ कर दूसरी हाई टेन्सन
लाइन से लगभग 50 मीटर नीचे दूसरी पार तक -यहाँ पुल की लम्बाई लगभग 450 मीटर
आएगी.
स्थिति स--घुघरा मिनी वाटर फाल के नीचे; इस पार से उस पार तक, यहाँ पुल की लम्बाई
लगभग 600 मीटर आती है.
विकल्पों पर विचार-- -स्थिति अ -अनुसार लम्हेटा घाट से शनि मंदिर तक झूला
पुल को सुरक्षा की दृष्टि से अधिकतम बाढ़ स्तर से ऊपर रखने में पुल की लम्बाई में
अपेक्षाकृत वृध्दि हो रही है साथ ही लम्हेती स्थित तीर्थ भी इस परिक्रमा में अछूते रह जाते हैं.
जबकि स्थिति स- अनुसार घुघरा फाल पर इस पार से उस पार तक सतह की चट्टानों पर
उभरे गोल निशानों को देखते हुए भंवर (eddy current) की संभावना से इंकार नहीं किया जा
सकता है. घुघरा मिनी फाल के ऊपर जल-प्रवाह दो धाराओं में विभाजित दिखाई देता है. नर्मदा
स्वयं यहाँ 90 अंश के कोण में घूम कर बहती है. लोगों ने बताया कि इस फाल के ठीक नीचे
नर्मदा की अधिकतम गहराई है. साथ ही, यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि नगरपालिक निगम
के रमनगरा जल शोधन संयंत्र के जल स्तर बनाये रखने के लिए इस फाल पर एक पिक अप
वियर बनाये जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है.
स्थिति ब पर परमहंस आश्रम से उस पार तक नर्मदा का न्यूनतम पाट (चौड़ाई) तथा दोनों
तरफ एक्सपोज्ड हार्ड रॉक होने से यह झूला पुल के लिए युक्ति युक्त साईट है.
आधारभूत आंकड़े -- - स्थिति ब- के अनुसार आधारभूत आंकड़े एकत्रित किये गये--
हाई फ्लड लेबिल -- -- वर्ष 1926 में आई अधिकतम बाढ़ स्तर 385.47 मीटर को झूला पुल में
गणना हेतु लिया जाना उचित होगा.पुष्टि हेतु तिलवारा घाट पर बने एक्वाडक्ट तथा
निर्माणाधीन अतिरिक्त-पुल के रूपांकन में में इसी बाढ़ स्तर को आधार माना गया है.
ग्राउंड लेबिल-- श्री राधाकृष्ण मंदिर के चबूतरे पर टोपोशीट में दर्शित स्पॉट लेबिल का अध्ययन
करने पर 390 मीटर दर्ज है. निर्माण के लिए इस लेबिल को आधार माना जा सकता है.
स्ट्रेटा -- भौतिक अवलोकन से सुस्पष्ट है कि प्रस्तावित पुल के टॉवर की नींव हेतु कड़ी
चट्टानें उपलब्ध हैं. घाट के दोनों तरफ उपलब्ध वायोटाईट स्सिष्ट; यूँ तो, हार्ड रॉक का
निकृष्टतम प्रकार है, फिर भी गिरी हालत में उसकी न्यूनतम दाब-क्षमता 50 t/sqm प्राप्त हो

जाती है,जो कि नींव-आधार(foundation) के लिए पर्याप्त है. लम्हेटा घाट के बाद परावर्तित
चट्टानों की उपलब्धता है, विशेषकर सॉफ्ट स्टोन और संगमरमर ( फिशरड मार्वल रॉक)
झूला पुल की स्थिति का औचित्य-
लम्हेटाघाट पर प्रस्तावित पुल के अपस्ट्रीम में लगभग 4 किलोमीटर पर नर्मदा पार करने के
लिए तिलवारा घाट पर राष्ट्रीय राज मार्ग-7 पर पुल स्थित है. जबकि डाउन-स्ट्रीम में लगभग
25 किलोमीटर दूर चरगवां से शहपुरा के लिए डिस्ट्रिक्ट रोड के लिए पुल बना है.
पर्यटन को दृष्टिगत करते हुए भेडाघाट में एक रोप-वे है; जिसमें बैठकर सैलानी, नर्मदा के
संगमरमरी-सौन्दर्य का विहंगावलोकन करते है. भेडाघाट से न्यू-भेडाघाट को जाने की यह
सशुल्क व्यवस्था है. प्रस्तावित स्थल से उक्त रोप- वे की दूरी मात्र 3 किलोमीटर है.
यह भी जानकारी मिली है कि सरस्वती घाट(4 किलोमीटर दूर) पर एक नये सेतु-निर्माण हेतु
प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जा रहा है.
केबिल-स्टे- ब्रिज बनाम सस्पेंशन ब्रिज--
केबिल स्टे ब्रिज-- (रज्जु कर्षण सेतु) इसमें एक या अधिक स्तम्भ होते हैं,(जिन्हें
टावर या पायलान भी कहते है) जो स्तम्भ इस्पात रज्जुओं(केबिल) द्वारा सेतु की सतह का
भार सँभालते हैं. यह झूला पुल का ही प्रचलित रूप है.इनमें प्रमुख हैं-- विद्यासागर
सेतु(कोलकाता), बांद्रा -वरली सी लिंक (मुंबई), न्यू यमुना ब्रिज(इलाहाबाद), रामसेतु (नागपुर),
,कोटा चम्बल ब्रिज(कोटा), राजा भोज सेतु(भोपाल). राजा भोज सेतु के लोकार्पण के समय
टाइम्स ऑफ़ इण्डिया की एक रिपोर्ट की छायाप्रति(संलग्नक 3) में उसका विवरण और लागत
है.
झूला पुल-में मुख्यत: दो तार(केबिल) के समूह होते हैं,जो मार्ग के दोनों ओर रज्जुवक्र
(कैट्नरी) की आकृति में लटकते हैं और जिनसे सारा रास्ता झूलों द्वारा लटकता है. लक्षमण-
झूला(ऋषिकेश),राम झूला(श्रषिकेश), ओमकारेश्वर पुल (खंडवा) और सुदामा सेतु (व्दारका) इसके
उदाहरण हैं. 2016 में निर्मित सुदामा-सेतु की गूगल की वेबसाइट(विकिपडिया) पर उपलब्ध
जानकारी संलग्नक 4 के अनुसार है. वह सेतु पर्यटन विकास की दृष्टि से बनाया गया है और
उस पर प्रवेश हेतु दस रूपये शुल्क लिया जाता है.
सामान्यत: केबिल स्टे ब्रिज लम्बे स्पान के लिये उपयोगी होते हैंऔर उनकी लागत अधिक
आती है, अत: लम्हेटा घाट पर 450 मीटर स्पान के लिये झूला-पुल एक बेहतर विकल्प है.
लम्हेटा घाट पर झूला पुल बनाने से होने वाले फायदे--
1-- क्षेत्रवासियों को वर्ष भर नर्मदा पर करने की सुविधा मिलेगी.इससे नर्मदा के दक्षिणी तटवासी
अपनी लघु उपज: यथा, साग-सब्जियां, फल, फूल, वनोपज, महुआ, दूध और उसके अन्य
उत्पाद और कुटीर उद्योग की निर्मित वस्तुएं शहर में लाकर बेच सकेंगे.

2-लम्हेटा और लम्हेटी तथा आस-पास के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व के स्थलों का
विकास होगा.
3-पर्यटन का विकास एवम सुविधाएँ होने से शहर में सैलानियों की संख्या बढ़ेगी. भेडाघाट आने
वाला व्यक्ति लम्हेटा घाट आकर यहाँ से मां नर्मदा के अप्रतिम सौन्दर्य का रसास्वादन कर
सकेगा.
4-प्राकृतिक,पुरातात्विक और भू-तकनीकी विरासतों के अवलोकन की सुविधा होने पर शोध के
नये आयाम स्थापित होंगे.
5-झूला पुल पर सुदामा सेतु जैसा न्यूनतम प्रवेश शुल्क लगाने पर अतिरिक्त राजस्व की
प्राप्ति हो सकेगी.
6-पंचकोशी परिक्रमावासियों की बहु-प्रतीक्षित मांग की प्रतिपूर्ति होगी.
तकनीकी विवरण-- -
पुल का प्रकार- (suspenson bridge)--झूला पुल
यातायात-- -पदयात्री मात्र
लम्बाई -- -450 मीटर
चौड़ाई (पाथवे)-- 1.8 मीटर( 6 फीट)/आपात स्थिति में इस पर से एम्बुलेंस भी निकली जा
सकती है.
रोड लेबिल -- 387 मीटर
हाई फ्लड लेविल -- 385.47 मीटर(1926 के आधार पर)
फ्री बोर्ड -- 1.53 मीटर
फाउन्डेशन -- ओपन- कम से कम तीन मीटर राक में
सस्पेंशन केबिल -- हाई टेनसाइल सस्ट्रेंड
सपोर्टिंग टावर एवम एंकरेज कार्य -- आर सी सी - दोनों सिरों पर
आई आर सी 6-2014 के अनुसार लोडिंग लिया जाना प्रस्तावित है.
आई आर सी 21-2014 के अनुसार कंक्रीट/ आर आर सी के स्पेसीफिकेशन लिया जाना
प्रस्तावित है.
आई एस 1393-2014 के अनुसार भूकम्प के लिए प्रावधान लिए जाना प्रस्तावित है.
प्रारूप ड्राइंग(सलंग्नक 5) अवलोकनार्थ एवम अनुमोदनार्थ प्रस्तुत है. प्रशासकीय स्वीकृति के
बाद झूला पुल का विस्तृत सर्वेक्षण अवम अनुसन्धान कर डिजाईन, ड्राइंग और प्राक्कलन
प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है.
अनुमानित लागत हेतु मापदंड -- भारत देश में विगत वर्ष वर्ष 2016 में
झुला पुल का निर्माण प्रसिध्द तीर्थस्थल व्दारका जो गुजरात प्रदेश में स्थित है, इस पुल की
लम्बाई 166 मीटर और लागत मूल्य 7.42 करोड़ रूपये(संलग्नक-4) है. इसकी प्रति मीटर
लागत 4.46 लाख रूपये आती है. इसमें यदि मूल्य वृध्दि को जोडा जावे तो प्रति मीटर
लागत मूल्य रूपये 5.00 लाख प्रति मीटर आता है. तदानुसार लम्हेटा घाट पर प्रस्तावित

झूला पुल की लागत 22.50 करोड़ रूपये आती है. यह एक प्रथमदृष्टया आकलन मात्र है,
विस्तृत डिजाईन के बाद प्राक्कलन तैयार कर एक मुश्त निविदा आमंत्रित कर ठेकेदार की
डिजाईन पर निविदत्त-लागत, वास्तविक लागत होगी. वैसे; मध्यप्रदेश में निर्मित 300 मीटर
लम्बे राजा भोज केबिल-स्टे- सेतु, भोपाल की अंतिम लागत 40 करोड़ उल्लिखित है .(संलग्नक-
3)
कलेक्टर जबलपुर को प्रस्ताव प्रस्तुत-- 27 दिसम्बर 2017 को पंचकोसी-परिक्रमावासियों के
प्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह प्रस्ताव जिला कलेक्टर को सौंपा, जिसे विभागीय अनुशंसा
के साथ शासन को भेजा गया.
निष्कर्ष --उक्त सभी बिन्दुओं पर विचार करते हुए लम्हेटा घाट से लम्हेटी तक
पंचकोसीय परिक्रमावासियों और ग्रामवासियों को नर्मदा नदी पर सुगम आवागमन के लिए
स्थिति ब(परमहंस आश्रम से उस पार तक) के अनुसार लक्ष्मण-झूला जिसे “नर्मदा-झूला” या
“माई का झूला” भी कहा जा सकता है, विकास की दृष्टि से बहुउद्देशीय परियोजना होगी जो
कि जबलपुर जिले के एक आध्यात्मिक मोक्षदायिनी घाट पर धर्म, भू-गर्भीय अध्ययन और
पर्यटन की त्रिवेणी प्रवाहित करने में उपयोगी होगी.




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