शनिवार, 27 जुलाई 2019

दोहा सलिला

दोहा सलिला 
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सद्गुरु ओशो ज्ञान दें, बुद्धि प्रदीपा ज्योत
रवि-शंकर खद्योत को, कर दें हँस प्रद्योत 
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गुरु-छाया से हो सके, ताप तिमिर का दूर. 
शंका मिट विश्वास हो, दिव्य-चक्षु युत सूर.
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गुरु गुरुता पर्याय हो, खूब रहे सारल्यदृढ़ता में गिरिवत रहे, सलिला सा तारल्य
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गुरु गरिमा हो हिमगिरी, शंका का कर अंत 
गुरु महिमा मंदाकिनी, शिष्य नहा हो संत

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गरज-गरज कर जा रहे, बिन बरसे घन श्याम. 
शशि-मुख राधा मानकर, लिपटे क्या घनश्याम.

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