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सोमवार, 18 सितंबर 2017

shringaar geet

श्रृंगार गीत:
हरसिंगार मुस्काए
संजीव 'सलिल'
*
खिलखिलायीं पल भर तुम
हरसिंगार मुस्काए
. 
अँखियों के पारिजात
उठें-गिरें पलक-पात
हरिचंदन देह धवल
मंदारी मन प्रभात
शुक्लांगी नयनों में
शेफाली शरमाए
. 
परिजाता मन भाता
अनकहनी कह जाता
महुआ मन महक रहा
टेसू तन झुलसाता
फागुन में सावन की
हो प्रतीति भरमाए
. 
कर-कुदाल-कदम माथ
पनघट खलिहान साथ, 
सजनी-सिन्दूर सजा-
चढ़ सिउली सजन-माथ?
हिलमिल चाँदनी-धूप
धूप-छाँव बन गाए
*
हरसिंगार पर्यायवाची: हरिश्रृंगार, पारिजात, शेफाली, श्वेतकेसरी, हरिचन्दन, शुक्लांगी, मंदारी, परिजाता, पविझमल्ली, सिउली, night jasmine, coral jasmine, jasminum nitidum, nycanthes arboritristis, nyclan. 
salil.sanjiv@gmail.com,९४२५१८३२४४
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